भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: भारतीय किसान संघ ने किया स्वागत, जीएम उत्पादों पर सरकार से मांगा स्पष्ट रुख

 




जबलपुर।देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने समझौते का स्वागत करते हुए किसानों के हितों और जनस्वास्थ्य से जुड़े कुछ गंभीर मुद्दों पर भारत सरकार से स्पष्टता की मांग की है।

महामंत्री श्री मिश्र ने बताया कि वाणिज्य मंत्री की पत्रकार वार्ता के अनुसार गेहूं, चावल, दूध, डेयरी उत्पाद, फल, सब्जी और मसालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। भारतीय किसान संघ ने इसे भारतीय किसानों की सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए सरकार के प्रति आभार जताया।

हालांकि, संगठन ने समझौते में प्रयुक्त ‘संवेदनशील उत्पाद’ शब्द को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। श्री मिश्र ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस श्रेणी में किन-किन उत्पादों को शामिल किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) उत्पाद, जिनका उपयोग वहां मुख्य रूप से पशु आहार के रूप में होता है, उन्हें किसी भी नाम, शर्त या माध्यम से भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया कि देश की शोध संपदा, किसानों के भविष्य और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए जीएम उत्पादों को रोकना अनिवार्य है।

विज्ञप्ति में जीएम फसलों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए श्री मिश्र ने कहा कि भारत में अब तक खाद्यान्न फसलों में जीएम को अनुमति नहीं दी गई है, क्योंकि इनके मनुष्य और जीवजगत के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जनता का स्वास्थ्य और जैव विविधता किसी भी व्यापारिक लाभ से ऊपर है। संगठन का मानना है कि जीएम फसलें कई देशों में असफल साबित हुई हैं और भारत में भी इनके खिलाफ व्यापक जनविरोध मौजूद है।

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