गर्मियों का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप और उमस के कारण शरीर का बुरा हाल हो जाता है। ऐसे में अचानक चक्कर आना, डिहाइड्रेशन, कमजोरी लगना या आंखों के सामने अंधेरा छा जाना एक बहुत ही आम बात है। जब भी घर में किसी को ऐसी दिक्कत होती है, तो हम तुरंत या तो ग्लूकोज घोलकर दे देते हैं या फिर ओआरएस (ORS) पिलाने लगते हैं। पत्रिका की खास बातचीत में फिजिशियन डॉक्टर नवीन यादव (MBBS) ने बताया कि ORS कब पीना चाहिए और कब नहीं। साथ ही इसे घर पर कैसे बनाएं।
डॉक्टर यादव के अनुसार, जब शरीर से पानी के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं, तब ओआरएस पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।लगातार दस्त या उल्टी होने पर।
तेज धूप और लू लगने पर।
बहुत ज्यादा पसीना निकल जाने पर।
हर तरह की कमजोरी या थकान में ओआरएस पीना सही नहीं होता। डॉक्टर का कहना है कि जो लोग हाई ब्लड प्रेशर (High BP) या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना ओआरएस नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसमें सोडियम होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है।
इसी तरह, किडनी और शुगर के मरीजों को भी इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए। अगर शरीर में पानी और नमक की कमी नहीं है, तो बिना वजह ओआरएस पीने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन ना करें।घर पर ओआरएस घोल कैसे तैयार करें?
बाजार में मिलने वाले ओआरएस के पैकेट को हमेशा 1 लीटर साफ पानी में ही घोलना चाहिए। इसके बारे में पैकेट के पीछे भी स्टेप बाय स्टेप जानकारी दी होती है। लेकिन अगर आपके पास पैकेट उपलब्ध नहीं है, तो आप इसे घर पर मौजूद चीजों से भी बना सकते हैं।
इसके लिए सबसे पहले 1 लीटर पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा कर लें। अब इस पानी में 6 छोटी चम्मच चीनी और आधा छोटी चम्मच नमक डालें। इस घोल को तब तक अच्छी तरह मिलाएं जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए। ध्यान रहे कि स्वाद बढ़ाने के चक्कर में इसमें ऊपर से कोई रंग, जूस या एक्स्ट्रा चीनी-नमक बिल्कुल न मिलाएं।
घर पर बनाए गए या पैकेट वाले ओआरएस घोल को बनाने के बाद केवल 24 घंटे के भीतर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 24 घंटे से ज्यादा पुराने हो चुके घोल को फेंक देना चाहिए और नया घोल बनाना चाहिए। साथ ही, इसका स्वाद बढ़ाने के चक्कर में इसमें ऊपर से कोई जूस, शहद या एक्स्ट्रा चीनी-नमक बिल्कुल न मिलाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।