अमेरिकी जॉब मार्केट में बड़ी सुस्ती: जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां, अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चिंता



वॉशिंगटन। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले अमेरिका के श्रम बाजार में जून 2026 के दौरान उम्मीद से कहीं अधिक कमजोरी देखने को मिली है। अमेरिकी श्रम विभाग (लेबर डिपार्टमेंट) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार के अनुमान से काफी कम हैं और मई के मुकाबले आधे से भी कम हैं। इन आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लगातार बनी महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापारिक नीतियों का असर अब सीधे रोजगार बाजार पर दिखाई देने लगा है। कंपनियां नए निवेश और भर्ती को लेकर सतर्क हो गई हैं, जिससे रोजगार सृजन की गति धीमी पड़ गई है।

ट्रंप की व्यापारिक नीतियों पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार और टैरिफ नीतियों ने अमेरिकी उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाया है। आयातित वस्तुओं पर बढ़े शुल्क और कई देशों के साथ व्यापारिक तनाव के कारण कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ी है।

बढ़ती लागत और भविष्य की मांग को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते कई कंपनियां विस्तार योजनाओं को टाल रही हैं और नई भर्तियों से भी बच रही हैं। विपक्षी दलों ने भी इन आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए रोजगार सृजन में आई गिरावट के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर उतनी सकारात्मक नहीं

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की आधिकारिक बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ गई है। हालांकि पहली नजर में यह सकारात्मक संकेत लगता है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे वास्तविक कारण चिंताजनक हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने नौकरी की तलाश छोड़ दी है, जो लंबे समय से रोजगार नहीं पा सके थे। चूंकि सक्रिय रूप से नौकरी नहीं खोजने वाले लोगों को बेरोजगारों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किया जाता, इसलिए बेरोजगारी दर कृत्रिम रूप से कम दिखाई दे रही है।

पांच साल के निचले स्तर पर श्रम भागीदारी

अमेरिका का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत रह गया है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की श्रम भागीदारी दर भी घटकर 83.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में लोग रोजगार बाजार से बाहर हो रहे हैं, जो किसी भी विकसित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है।

कंस्ट्रक्शन में राहत, टेक सेक्टर में संकट बरकरार

रोजगार के क्षेत्रवार आंकड़ों में कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कुछ नई नौकरियों का सृजन हुआ है। इसका प्रमुख कारण डेटा सेंटर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बढ़ता निवेश माना जा रहा है।

इसके विपरीत, टेक सेक्टर में संकट लगातार गहराता जा रहा है। मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या में कटौती जारी रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में बड़े निवेश के कारण लागत कम करने के लिए छंटनी कर रही हैं। पिछले 18 महीनों में सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार गिरावट का यह 17वां मामला दर्ज किया गया है।

फेडरल रिजर्व के सामने बढ़ी चुनौती

कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि आर्थिक गतिविधियों में यही सुस्ती बनी रहती है, तो ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, सालाना आधार पर वेतन में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वेतन वृद्धि से रोजगार बाजार की मूलभूत कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब फेडरल रिजर्व को महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाना होगा।

अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी

आर्थिक जानकारों का मानना है कि जून के रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी का संकेत हैं। यदि आने वाले महीनों में निवेश और रोजगार सृजन की गति नहीं बढ़ी, तो इसका असर उपभोक्ता खर्च, औद्योगिक उत्पादन और समग्र आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और फेडरल रिजर्व के अगले कदमों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post