सुहागिनों का पर्व हरियाली तीज इस साल कब है? बन रहा शुभ योग, जानें तारीख और पूजा मुहूर्त

 


सावन महीने के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज पर्व मनाया जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष है. मान्‍यता है कि हरियाली तीज व्रत करने और इस दिन भगवान विष्‍णु-माता लक्ष्‍मी की पूजा करने से अखंड सौभाग्‍य प्राप्‍त होता है. इस व्रत के महत्‍व का वर्णन शिव पुराण और स्‍कंद पुराण में भी किया गया है.

इस साल 30 जुलाई 2026 से सावन महीना प्रारंभ हो रहा है और इसी के साथ शुरू होगा ढेर सारे त्‍योहारों का मौसम, जिनमें हरियाली तीज, कजरी तीज, रक्षाबंधन आदि शामिल हैं. जानिए हरियाली तीज कब है. 

हरियाली तीज कब है? 

वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर आरंभ होगी और अगले दिन 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर 15 अगस्‍त 2026 को हरियाली तीज व्रत रखा जाएगा. 

सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्‍य और मनपसंद पति पाने के लिए हरियाली तीज व्रत रखा जाता है इसलिए अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत रखती हैं. 

हरियाली तीज पर पूजा मुहूर्त 2026 

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 से 05:35 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 01:08 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 से 03:42 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 से 07:29 तक
अमृत काल: रात 08:18 से 09:53 तक

हरियाली तीज पर शुभ योग

हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. क्‍योंकि इस व्रत को शिव और पार्वती के मिलन से जोड़ा गया है. वहीं इस साल 15 अगस्‍त को हरियाली तीज के दिन शिव योग बन रहा है. जिसमें की गई पूजा का कई गुना फल मिलेगा. इसके अलावा इस दिन सिद्ध योग और रवि योग भी बन रहे हैं. 

हरियाली तीज पूजा विधि 

- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान करके, साफ कपड़े पहनें. इस दिन हरा रंग पहनना विशेष शुभ माना गया है क्‍योंकि सावन में चारों ओर हरियाली होती है. 

- फिर हरियाली तीज व्रत का संकल्‍प लें. सूर्य को अर्घ्‍य दें और पूजा की तैयारी करें. 

- पूजा स्‍थल को साफ करें. गंगाजल छिड़कें. मिट्टी से भगवान गणेश, शिव और पार्वती की मूर्ति बनाएं या बाजार से भी मूर्ति ले सकते हैं. चौकी पर हरा वस्‍त्र बिछाकर मूर्ति या चित्र विराजित करें. 
 
- अक्षत, चंदन, फूल चढ़ाएं. माता पार्वती को कुमकुम और श्रृंगार अर्पित करें. दीपक जलाएं. भोग लगाएं. 

- मंत्र, चालीसा, स्त्रोत आदि पढ़ें. कथा सुनें या पढ़ें. अंत में आरती कर लें. फिर रात पर भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें. अगले दिन चतुर्थी तिथि को सुबह स्‍नान करें, भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें. फिर सात्विक चीजें खाकर व्रत खोलें.

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