जबलपुर में शराब पर 'ओवररेटिंग' का खेल! MRP से ज्यादा वसूली के आरोप, आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

 


जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में नए वित्तीय वर्ष से लागू हुए शराब ठेकों के बाद शराब की कीमतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई शराब दुकानों पर ग्राहकों से मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) से अधिक राशि वसूली जा रही है। आरोप है कि यह केवल इक्का-दुक्का दुकानों तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के कई ठेकों पर एक जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में कुछ बड़े शराब ठेकेदारों ने आपसी समन्वय से एक कथित 'सिंडिकेट' बनाया है। आरोप है कि इसी के प्रभाव में कई दुकानों पर शराब की कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ा दी गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

130 का पौवा 150 में, बीयर पर भी अतिरिक्त वसूली के आरोप

ग्राहकों का दावा है कि जिन ब्रांडों का अंग्रेजी शराब का पौवा ₹130 में मिलना चाहिए, उसके लिए ₹150 तक वसूले जा रहे हैं। इसी तरह ₹200 MRP वाली बीयर की बोतल ₹230 से ₹250 तक में बेची जा रही है। अलग-अलग दुकानों पर एक ही ब्रांड की अलग-अलग कीमतें होने से उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि जो ठेकेदार इस कथित सिंडिकेट का हिस्सा नहीं हैं, उन पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में आबकारी विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

रेट लिस्ट गायब, बिल मांगने पर विवाद

नियमों के अनुसार प्रत्येक शराब दुकान पर रेट लिस्ट प्रदर्शित करना अनिवार्य है, लेकिन कई दुकानों पर यह सूची दिखाई नहीं दे रही। ग्राहकों का आरोप है कि जब वे ओवररेटिंग का विरोध करते हैं या पक्का बिल मांगते हैं तो कर्मचारियों द्वारा बिल देने से इनकार कर दिया जाता है। कुछ ग्राहकों ने कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार करने के भी आरोप लगाए हैं।

QR कोड व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

शराब ठेका नियमों के अनुसार प्रत्येक दुकान पर QR Code लगाया जाना चाहिए, जिससे ग्राहक स्कैन कर शराब की अधिकृत कीमत देख सकें। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई दुकानों पर यह व्यवस्था या तो उपलब्ध नहीं है या प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही।

पहले हुई थी कार्रवाई, अब फिर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार, पूर्व में ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आने पर तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर जांच कराई गई थी और कई मामलों में कार्रवाई भी हुई थी। लेकिन अब एक बार फिर ऐसी शिकायतें सामने आने से आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

आबकारी विभाग पर भी लग रहे आरोप

शहर में चर्चा है कि ओवररेटिंग की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। कुछ लोगों ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई है।

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