भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लंबे समय से इंतजार की जा रही तबादला प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने आज से तबादलों पर लगी रोक हटा दी है, जिसके बाद विभिन्न विभाग 15 जून तक प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण कर सकेंगे। इस बार रिक्त पदों को भरने पर विशेष जोर दिया गया है, जबकि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को तबादला प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार जिलों के भीतर होने वाले स्थानांतरण का अधिकार संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के पास रहेगा। वहीं प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समन्वय और अनुमति से ही किए जा सकेंगे।
कई सेवाएं तबादला नीति से बाहर
नई तबादला नीति के तहत मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय के कर्मचारियों को इस नीति के दायरे से बाहर रखा गया है। शिक्षकों के स्थानांतरण स्कूल शिक्षा विभाग की अलग नीति के तहत किए जाएंगे, जबकि पुलिस विभाग में तबादले तबादला बोर्ड की प्रक्रिया के अनुसार होंगे।
कलेक्टर और प्रभारी मंत्री निभाएंगे अहम भूमिका
जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण का अधिकार जिला कलेक्टर को दिया गया है, लेकिन इसके लिए प्रभारी मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होगी। वहीं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के तबादले संबंधित विभागीय मंत्री की अनुमति से किए जाएंगे।
डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की पदस्थापना भी प्रभारी मंत्री की सलाह के आधार पर की जाएगी।
पुलिस विभाग में बढ़ी हलचल
पुलिस मुख्यालय ने आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक के कर्मचारियों के तबादले 5 जून तक करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने स्थानांतरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
विभागों ने मांगी कर्मचारियों की जानकारी
शिक्षा विभाग सहित कई विभागों ने जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों का विवरण तलब किया है। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू हुई नीति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को वर्ष 2026 की तबादला नीति जारी की थी। सभी विभागों को अपनी विभागीय नीति तैयार कर आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
विभागवार तय हुई तबादलों की सीमा
नई नीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या के आधार पर स्थानांतरण की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है—
- 200 तक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले।
- 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 15 प्रतिशत तबादले।
- 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 10 प्रतिशत तबादले।
- 2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 प्रतिशत तबादले।
15 जून तक जारी रहेगी प्रक्रिया
राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी विभाग 15 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। इसके बाद तबादलों पर पुनः रोक लागू हो जाएगी।
