शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का बिगुल: लाठियां लेकर अवैध भट्टियों पर बोला धावा, लाहन बहाया, उपकरण तोड़े

 


शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का बिगुल: लाठियां लेकर अवैध भट्टियों पर बोला धावा, लाहन बहाया, उपकरण तोड़े

महापंचायत के संकल्प के बाद शिवपुरी के कफार गांव में महिलाओं का बड़ा अभियान, पुलिस-आबकारी की निष्क्रियता पर उठे सवाल

शिवपुरी। जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कफार में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं ने गुरुवार को अभूतपूर्व अभियान चलाया। करीब दो हजार की आबादी वाले गांव में सैकड़ों महिलाओं ने लाठियां हाथ में लेकर एकजुटता दिखाई और गांव में संचालित अवैध शराब की भट्टियों पर धावा बोल दिया। महिलाओं ने शराब बनाने के उपकरणों और ड्रमों को तोड़ दिया, जबकि मौके पर मौजूद बड़ी मात्रा में तैयार लाहन और महुआ को सड़कों पर बहा दिया। इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

घरेलू हिंसा और परिवारों की बर्बादी बनी आंदोलन की वजह

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव में लंबे समय से खुलेआम अवैध शराब बनाई और बेची जा रही थी। शराब की आसान उपलब्धता के कारण अधिकांश पुरुष नशे के आदी हो चुके थे, जिससे घरों में आए दिन विवाद, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थीं। महिलाओं के अनुसार, शराब की लत ने कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी बुरी तरह प्रभावित किया और अनेक घर संकट में पहुंच गए।

प्रशासन से शिकायतें बेअसर, फिर महिलाओं ने संभाला मोर्चा

महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार को बंद कराने के लिए उन्होंने कई बार पुलिस और आबकारी विभाग से शिकायत की, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी के बाद महिलाओं ने स्वयं मोर्चा संभालने का निर्णय लिया और गांव को नशामुक्त बनाने के लिए अवैध शराब के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

तीन-चार ठिकानों पर कार्रवाई, दोबारा धंधा शुरू करने पर चेतावनी

महिलाओं के अनुसार गांव में कुछ लोगों द्वारा तीन से चार स्थानों पर अवैध रूप से कच्ची शराब तैयार की जा रही थी। महिलाओं ने सभी ठिकानों पर पहुंचकर शराब बनाने के बर्तन, ड्रम और अन्य उपकरण तोड़ दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी ने गांव में दोबारा शराब बनाने या बेचने का प्रयास किया तो उससे भी अधिक सख्त विरोध किया जाएगा।

महापंचायत में लिया था शराबबंदी का संकल्प

ग्रामीणों ने बताया कि 12 जुलाई को आदिवासी सहरिया समाज की महापंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें गांव को पूर्ण रूप से नशामुक्त बनाने का सामूहिक निर्णय लिया गया। पंचायत में यह भी तय किया गया कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का कारोबार नहीं करेगा और न ही शराब का सेवन करेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ₹5,100 का आर्थिक दंड लगाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया था।

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