नागरिक संगठनों ने जताई चिंता, 22 जुलाई को विधानसभा में सरकार से मांगा जाएगा जवाब
जबलपुर। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (मेडिकल यूनिवर्सिटी) के संभावित विभाजन की चर्चाओं के बीच जबलपुर में राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर विरोध तेज हो गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच सहित कई सामाजिक संगठनों ने विश्वविद्यालय के संभावित विखंडन का विरोध करते हुए इसे जबलपुर की शैक्षणिक पहचान के लिए नुकसानदायक बताया है। वहीं क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा सचिवालय में ध्यानाकर्षण प्रश्न लगाया है। इस संबंध में उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जवाब मांगा गया है, जिस पर 22 जुलाई को विधानसभा में चर्चा होने की संभावना है।विभाजन की चर्चाओं से बढ़ी चिंता
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के संभावित पुनर्गठन या विभाजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तैयारियां किए जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इन खबरों के बाद शहर के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों में चिंता का माहौल है।
समिति गठन नहीं होने पर उठे सवाल
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर किसी विशेषज्ञ समिति के गठन या व्यापक परामर्श के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाने की चर्चाएं उचित नहीं हैं। उनका मानना है कि यदि विश्वविद्यालय का विभाजन किया जाता है तो इससे जबलपुर की चिकित्सा शिक्षा और शैक्षणिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
नागरिक मंच ने आंदोलन की चेतावनी दी
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के वर्तमान स्वरूप में बदलाव का निर्णय लिया जाता है तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। मंच का कहना है कि विश्वविद्यालय महाकौशल क्षेत्र की महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्था है और इसके संबंध में कोई भी निर्णय सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही लिया जाना चाहिए।
दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील
सामाजिक संगठनों ने महाकौशल क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर क्षेत्र के हित में आवाज उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल जबलपुर का नहीं, बल्कि पूरे महाकौशल अंचल की चिकित्सा शिक्षा और भविष्य से जुड़ा विषय है।
22 जुलाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को होने वाली विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां विधायक लखन घनघोरिया द्वारा लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रश्न पर सरकार का पक्ष सामने आ सकता है। इसके बाद ही विश्वविद्यालय के संभावित विभाजन को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
