क्या आप भी झगड़े के बाद पार्टनर से बात करना बंद कर देते हैं? रिलेशनशिप कोच ने बताया कब आदत बन जाती है टॉक्सिक

 


रिलेशनशिप में लड़ाई-झगड़े होना बिल्कुल नॉर्मल बात है। लेकिन झगड़े के बाद आप अपने पार्टनर के साथ कैसे बिहेव करते हैं, यही तय करता है कि रिश्ता मजबूत होगा या कमजोर। कई लोग नाराज होकर बात करना बंद कर देते हैं। कुछ लोग इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें खुद को शांत होने का समय चाहिए होता है, जबकि कुछ लोग सामने वाले को सजा देने के लिए ऐसा करते हैं। रिलेशनशिप कोच विनीता आप्टे का कहना है कि इन दोनों सिचुएशंस में बहुत बड़ा फर्क है। उन्होंने बताया कि कब चुप रहना सही है और कब यही साइलेंट ट्रीटमेंट रिश्ते के लिए टॉक्सिक बन सकता है।

हर्ट होने के बाद थोड़ा स्पेस लेना गलत नहीं

विनीता आप्टे कहती हैं कि अगर झगड़े के बाद आप बहुत ज्यादा हर्ट हैं या गुस्से में हैं, तो उस समय बातचीत करना आसान नहीं होता। ऐसे में कुछ देर के लिए शांत हो जाना बिल्कुल नॉर्मल है। लेकिन बिना कुछ बताए अचानक बात बंद कर देना सही तरीका नहीं है।
अगर आपको टाइम चाहिए, तो अपने पार्टनर को बता दें कि अभी आपका मन बात करने का नहीं है और आप बाद में इस बारे में बात करेंगे। इससे सामने वाला यह समझ जाता है कि आप रिश्ते से भाग नहीं रहे, बल्कि खुद को शांत होने का समय दे रहे हैं। ( फोटो साभार: सांकेतिक तस्वीर: Pexels )
विनीता आप्टे कहती हैं कि जब आपका गुस्सा शांत हो जाए, तो उस बात पर दोबारा जरूर बात करें। सिर्फ सॉरी बोलकर मामला खत्म कर देना हमेशा काफी नहीं होता। यह समझना भी जरूरी है कि झगड़ा किस वजह से हुआ, किस बात से दुख पहुंचा और आगे ऐसी स्थिति आए, तो उसे बेहतर तरीके से कैसे संभाला जाए। अगर हर बार बिना बात किए मामला खत्म कर दिया जाएगा, तो वही परेशानी कुछ समय बाद फिर से सामने आ सकती है।
विनीता आप्टे कहती हैं कि कई लोग जानबूझकर चुप्पी साध लेते हैं। उनका मकसद अपनी फीलिंग्स को संभालना नहीं, बल्कि सामने वाले को परेशान करना होता है। वे चाहते हैं कि उनका पार्टनर बार-बार आकर पूछे कि क्या हुआ, उन्हें मनाए और उनकी हर बात माने। इस तरह की चुप्पी रिश्ते को सुधारने के लिए नहीं, बल्कि सामने वाले को कंट्रोल करने या उसे परेशान करने के लिए होती है। ऐसे में साइलेंट ट्रीटमेंट एक टॉक्सिक बिहेवियर बन जाता है।
विनीता आप्टे की मानें तो अगर एक पार्टनर हर झगड़े के बाद बिना कुछ बताए बार-बार बात करना बंद कर देता है, तो दूसरा पार्टनर कन्फ्यूजन में पड़ जाता है। उसे समझ नहीं आता कि आखिर गलती क्या हुई और कई बार वह खुद को ही दोष देने लगता है। धीरे-धीरे दोनों के बीच खुलकर बात करना भी कम होने लगता है और रिश्ते में दूरी बढ़ने लगती है।

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