जबलपुर हॉस्पिटल में इलाज पर उठे सवाल: ICU से वेंटिलेटर तक क्या हुआ? परिजनों ने मांगी निष्पक्ष जांच

 

जबलपुर। नेपियर टाउन स्थित जबलपुर हॉस्पिटल में भर्ती एक मरीज की अचानक बिगड़ी हालत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जिस मरीज की हालत लगातार सुधर रही थी और जो सामान्य रूप से बातचीत कर रहा था, उसे कुछ ही मिनटों बाद वेंटिलेटर पर क्यों शिफ्ट कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार ओमती थाना क्षेत्र के भारतीपुर निवासी ज्ञानचंद सोनकर को कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें आईसीयू के बेड नंबर-13 पर रखा गया था। परिजनों का दावा है कि इलाज के दौरान मरीज की स्थिति लगातार बेहतर हो रही थी। वह पूरी तरह होश में थे, बातचीत कर रहे थे और मंगलवार रात करीब 8 बजे उन्होंने अपने बेटे मोहन सोनकर से घर जाने की इच्छा भी जताई थी।

10 मिनट बाद बदली पूरी तस्वीर

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने सफाई का हवाला देकर उन्हें करीब 10 मिनट के लिए आईसीयू से बाहर भेज दिया। जब वे वापस लौटे तो देखा कि मरीज वेंटिलेटर पर है। अस्पताल प्रबंधन ने इसकी वजह कार्डियक अरेस्ट बताई, लेकिन परिवार का कहना है कि इससे पहले तक मरीज की हालत सामान्य थी और सभी जांच रिपोर्ट भी संतोषजनक थीं।

'जब मरीज ठीक था तो वेंटिलेटर की जरूरत क्यों पड़ी?'

मरीज के बेटे मोहन सोनकर ने सवाल उठाया कि जब उनके पिता खुद घर जाने की बात कर रहे थे, तब अचानक ऐसी कौन-सी चिकित्सकीय स्थिति उत्पन्न हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों को बाहर करने के दौरान क्या हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी अस्पताल प्रबंधन नहीं दे रहा है।

परिवार का दावा है कि मरीज की ब्लड रिपोर्ट, सीटी स्कैन सहित अन्य जांच रिपोर्ट सामान्य थीं। उनका कहना है कि यदि मरीज की हालत गंभीर थी तो अस्पताल ने पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।

अस्पताल परिसर में हंगामा, जांच की मांग

घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा होता रहा। परिजनों ने इलाज की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

परिवार का आरोप है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और उन्हें पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से समाचार लिखे जाने तक इस मामले में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी

यह मामला अब चिकित्सा प्रक्रिया की पारदर्शिता और अस्पतालों की जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन गया है। हालांकि, परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच अभी शेष है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post