पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम के नामची जिले से एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ समरडंग स्थित राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना के तहत बनाई जा रही एक टनल में अचानक हुए भीषण भूस्खलन और संदिग्ध मीथेन गैस विस्फोट के कारण बड़ा हादसा हो गया।
इस टनल हादसे में अब तक 10 श्रमिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि सुरंग के भीतर कई अन्य मजदूर, इंजीनियर और अधिकारी फंसे हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिक्किम पुलिस और अग्निशमन सेवाओं की कई संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया।
मीथेन गैस रिसाव और कम दृश्यता के कारण राहत कार्य में आ रही भारी बाधा
हादसे के संबंध में मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह घटना तीस्ता स्टेज-VI परियोजना की एडीआईटी-3 (ADIT-3) टनल में हुई, जो प्रवेश द्वार से करीब 1.5 किलोमीटर अंदर स्थित है। बताया जा रहा है कि सुरंग के भीतर प्राकृतिक रूप से जमा हुई जहरीली मीथेन गैस को बाहर निकालने के प्रयास के दौरान अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जिसने टनल के बड़े हिस्से में भीषण भूस्खलन ला दिया।
भूस्खलन के मलबे से सुरंग का मुख्य निकास मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया और अंदर काम कर रहे लोग फंस गए। राहत कार्य में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को टनल के भीतर अत्यधिक जहरीली मीथेन गैस, ऑक्सीजन की भारी कमी और धुंध के कारण बचाव अभियान चलाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम तमांग से की बात; मृतकों में कई राज्यों के मजदूर शामिल
सिक्किम में हुए इस बड़े हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर स्थिति का पूरा ब्योरा लिया। प्रधानमंत्री ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की ओर से राज्य को हर संभव तकनीकी और ढांचागत मदद का पूरा आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री तमांग ने बताया कि राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता अंदर फंसे एक-एक व्यक्ति की जान बचाना है। अब तक बरामद किए गए 10 शवों में से कई की पहचान कर ली गई है, जिनमें पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, असम, पंजाब, उत्तराखंड के देहरादून और सिक्किम के स्थानीय निवासी शामिल हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए नामची और सिंगताम के जिला अस्पतालों में भेजा गया है।
एनडीआरएफ और एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद रहकर आधुनिक सेंसर, लाइफ डिटेक्टर और कैमरों की मदद से टनल के भीतर जीवन के संकेतों की तलाश कर रहे हैं।
