मझौली में धान खरीदी घोटाला: बिना एक दाना आए पोर्टल पर चढ़ा 3.53 करोड़ का आंकड़ा

 



केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर पर एफआईआर, 14,934 क्विंटल धान सिर्फ कागज़ों में



जबलपुर। जबलपुर जिले की मझौली तहसील में धान उपार्जन व्यवस्था की साख को झकझोर देने वाला बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मझौली स्थित श्रीजी वेयरहाउस (कोड 59333262) में बिना किसी वास्तविक आवक के ई-उपार्जन पोर्टल पर करोड़ों रुपये की धान खरीदी दर्शाकर शासन को चूना लगाने की कोशिश की गई। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने खरीदी केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी ब्रजेश कुमार जाटव की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीजी वेयरहाउस-136 में धान उपार्जन के दौरान केंद्र प्रभारी रत्नेश भट्ट और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन सेन ने मिलीभगत कर नियमों को ताक पर रखा। आरोप है कि बिना धान की भराई, तुलाई और सिलाई किए ही ई-उपार्जन पोर्टल पर फर्जी ऑनलाइन एंट्रियां कर दी गईं। पोर्टल पर कुल 14,934.50 क्विंटल धान की खरीदी दिखाई गई, जिसका सरकारी मूल्य 3,53,79,830 रुपये (तीन करोड़ तिरपन लाख उन्यासी हजार आठ सौ तीस) बैठता है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा खेल अनुचित आर्थिक लाभ और शासकीय राशि में हेराफेरी के इरादे से रचा गया।
जांच में खुली पोल: बोरियों का वजन निकला आधा-अधूरा

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल ने 13 और 14 जनवरी 2026 को केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। नियम के मुताबिक एक बोरी का वजन 40.580 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन मौके पर मौजूद बोरियों का औसत वजन 33.42 से 35 किलोग्राम के बीच पाया गया।

ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों और भौतिक स्टॉक का मिलान किया गया तो 14,934.50 क्विंटल धान कम मिला। जांच में यह भी सामने आया कि 174 किसानों के नाम पर 14,505.20 क्विंटल धान की फर्जी एंट्री की गई थी, जिसे पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने बाद में खुद ही डिलीट कराने का अनुरोध किया। केंद्र पर रखी बोरियों पर न तो किसान कोड अंकित था और न ही अनिवार्य स्टेंसिलिंग की गई थी।

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