सरकारी नाला बना ‘लक्ज़री सुविधा’, 2.64 करोड़ की चपत: सगड़ा में बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर के 7 पार्टनर EOW के शिकंजे में

 


जबलपुर। संस्कारधानी के सगड़ा क्षेत्र में सरकारी ज़मीन और पर्यावरणीय नियमों को रौंदकर अवैध कॉलोनी बसाने वाले बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर आखिरकार कानून का डंडा चला है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने फर्म के सात भागीदारों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि कॉलोनाइजरों ने सरकारी नाले और ग्रीन बेल्ट की भूमि पर कब्जा कर उसे “लक्ज़री सुविधाओं” के नाम पर बेचते हुए शासन को करीब 2.64 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई।

अनुमतियों की धज्जियां, नियमों की खुलेआम अवहेलना

शिकायतकर्ता अहमद वाहिद की शिकायत पर हुई जांच में सामने आया कि सगड़ा क्षेत्र में 2.985 हेक्टेयर भूमि पर ‘स्वास्तिक विलास’ नाम से कॉलोनी विकसित की गई। नगर निगम और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमतियों में तय शर्तों को फर्म ने कागज़ों तक सीमित रखा—मैदान में नियमों का कोई असर नहीं दिखा।
210 प्लॉट, लुभावने वादे और फरेब

ब्रोशर में भव्य जीवनशैली के सपने बेचकर 210 ग्राहकों को प्लॉट थमा दिए गए। कॉलोनी के बीच से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले और पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्धारित ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर वहीं गार्डन, जिम, स्विमिंग पूल और आंतरिक सड़कें बना दी गईं—ताकि वैल्यू बढ़े और मुनाफा कई गुना हो जाए।
नाले की ज़मीन पर मकान, 63 लाख में सौदा

जांच में यह भी सामने आया कि नाले की जमीन पर मकान नंबर G-06 खड़ा कर उसे 63 लाख रुपये में बेच दिया गया। ईओडब्ल्यू के मुताबिक जिस 0.12 हेक्टेयर नाले की भूमि पर कब्जा किया गया, उसकी मौजूदा सरकारी कीमत ही 2.64 करोड़ रुपये है।
इन पर दर्ज हुआ मामला

ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में मुख्य कॉलोनाइजर रजनीत जैन सहित नितिन जैन, अपूर्व सिंघई, पंकज गोयल, तथा भोपाल निवासी श्याम राठौर, श्रद्धा ममतानी और शिल्पा राठौर को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ धारा 406, 420 और 120-बी के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

इस कार्रवाई के बाद जबलपुर के अन्य अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप है। सवाल साफ है—क्या सरकारी ज़मीन को “लक्ज़री” बनाकर बेचने वालों पर अब सख्ती की स्थायी मुहर लगेगी, या फिर नियमों की अनदेखी का यह खेल नए नामों के साथ जारी रहेगा?

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