माघ मास की तिलकुटा चौथ कथा, इसके पाठ के बिना अधूरा है तिलकुंद चतुर्थी व्रत, माताएं जरूर पढ़ें

 


 तिलकुटा चौथ यानी तिलकुंद चतुर्थी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु और परिवार की सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उन्हें तिल व गुड़ का भोग लगाया जाता हैं। मान्यता है कि इस दिन विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन शाम को भगवान गणेश की पूजा के बाद माताओं को तिलकुटा चौथ की कथा जरूर सुननी चाहिए। तो आइए पढ़ते हैं तिलकुटा चौथ की व्रत कथा।


तिलकुटा चौथ व्रत कथा
एक साहूकार और एक साहूकारनी थे। वह धर्म पुण्य को नहीं मानते थे। इसके कारण उनके कोई बच्चा नहीं था। एक दिन साहूकारनी पड़ोसी के घर गयी। उस दिन सकट चौथ था, वहां पड़ोसन सकट चौथ की पूजा करके कहानी सुना रही थी। साहूकारनी ने पड़ोसन से पूछा कि तुम क्या कर रही हो? तब पड़ोसन बोली कि आज चौथ का व्रत है, इसलिए कहानी सुना रही हूं। साहूकारनी फिर बोली कि चौथ का व्रत करने से क्या होता है? उसकी बात सुनकर पड़ोसन ने बताया कि इस व्रत से अन्न, धन, सुहाग, पुत्र की प्राप्ति होती है। पड़ोसन की बातों को सुनकर साहूकारनी ने निर्णय लिया कि अगर मेरा गर्भ ठहर जाए तो में सवा सेर तिलकुट करूंगी और चौथ का व्रत करूंगी।
श्री गणेश भगवान की कृपा से साहूकारनी गर्भवती हो गई। इसके बाद वह बोली कि अगर मेरे लड़का हो जाए, तो मैं ढाई सेर तिलकुट करूंगी। कुछ दिन बाद उसके घर में लड़के का जन्म हुआ। साहूकारनी फिर बोली कि हे मेरे बेटे का विवाह हो जाएगा, तो सवा पांच सेर का तिलकुट करूंगी।समय बीतता गया और कुछ वर्षो के बाद उसके बेटे का विवाह तय हो गया, लेकिन साहूकारनी ने तिलकुट नहीं किया। इस कारण से चौथ माता क्रोधित हो गई। उन्होंने फेरो से पहले उसके बेटे को उठाकर पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। सभी वर को खोजने लगे पर वो कहीं नहीं मिला। परेशान होकर सारे लोग अपने-अपने घर को लौट गए। इधर जिस लड़की से साहूकारनी के लड़के का विवाह होने वाला था, वह अपनी सहेलियों के साथ जंगल में दूब लेने गई। तभी रास्ते में पीपल के पेड़ से आवाज आई कि ओ मेरी अर्धब्यहि। यह बात सुनकर जब लड़की घर आयी, उसके बाद वह धीरे-धीरे सूख कर कांटा होने लगी।
अपनी लड़की की हालत देखकर उसकी मां ने पूछा कि मैं तुम्हें अच्छा खाना खिलाती हूं फिर भी तू सूखती जा रही है? तब लड़की ने अपनी मां को बताया क वो दूब लेने जंगल गई थी तभी पीपल के पेड़ से एक की आवाज आती है कि ओ मेरी अर्धब्यहि। लड़की ने बताया कि उसके हाथों में मेहंदी लगा हुई है और सेहरा भी बांध है। तब उसकी मां ने पीपल के पेड़ के पास जा कर देखा, यह तो उसका जमाई ही है। तब उसकी मां ने जमाई से पूछा कि यहां क्यों बैठे हैं? मेरी बेटी तो अर्धब्यहि कर दी और अब क्या लोगे। साहूकारनी का बेटा बोला कि मेरी मां ने चौथ का तिलकुट बोला था लेकिन नहीं किया, इसलिए चौथ माता ने नाराज हो कर यहां बैठा दिया।

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