आज 19 जनवरी 2026 से माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है जिसका समापन 28 जनवरी को होगा। आदि शक्ति मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए माघ महीने की गुप्त नवरात्रि हिंदू श्रद्धालुओं के लिए बड़ा महत्व रखता है। कहते हैं अगर इस नवरात्रि में कुछ विशेष उपाय कर लिए जाएं तो जीवन के सारे कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। चलिए जानते हैं नवरात्रि के इन महा उपायों के बारे में-
गुप्त नवरात्रि में चुपचाप से कर लें ये महा उपाय
वैवाहिक जीवन खुशहाल बनाने के लिए
गुप्त नवरात्रि में वैवाहिक जीवन खुशहाल बनाने के लिए इस मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। ये मंत्र है, सब नार करहि परस्पर प्रीति चलहि स्वधर्म नीरत श्रुति नीति। इस मंत्र का जाप घी की आहुति के साथ 108 बार करना चाहिए। यदि 21 बार भी इस मंत्र को रोज जप लिया जाए तो समस्या दूर हो जाती है।
बुरी नजर से बचाने के लिए
यदि आपके घर या परिवार पर किसी की बुरी नजर लगी हो तो आपको गुप्त नवरात्रि में हनुमान चालीसा का निरंतर जप करते रहना चाहिए। जिस भी व्यक्ति पर नजर लगी है उसके बाएं पैर पर बजरंग बली को चढ़ाया काजल और माथे पर हनुमान जी का सिंदूर लगा दें। ऐसा करने से बुरी नजर उतर जाएगी।
करियर और बिजनेस में तरक्की के लिए
गुप्त नवरात्रि में भैरव बाबा के मंदिर का दर्शन जरूर करना चाहिए। ऐसे लोग जिनका रोजगार छिन गया हो अथवा जिनकी नौकरी नहीं लग रही वह नवरात्रि में भैरव मंदिर में प्रार्थना करें और अपनी दुख को दूर करने के लिए आशीर्वाद लें। ऐसा करना उनके दुख को दूर कर देगा।
आर्थिक तंगी से बचने के लिए
आर्थिक तंगी या गरीबी की मार झेल रहे लोगों को गुप्त नवरात्रि में किसी भी दिन पीपल के पेड़ के पत्ते पर राम का नाम लिख उसे हनुमान मंदिर में चढ़ा देना चाहिए। 11, 21 या 51 पत्तों पर श्रीराम का नाम लिखना चाहिए। इससे आर्थिक संकट दूर हो जाएगा।
रोग मुक्ति के लिए
यदि आप या आपके परिवार कोई सदस्य हमेशा बीमार रहता हो तो उसे 108 बार ”ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा श्यामा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते” मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इससे रोग-द्वेश आदि सब दूर हो जाते हैं।
सुख, समृद्धि, सफलता के लिए
सुख, समृद्धि, सफलता, खुशी, आनंद और प्रेम के प्राप्ति के लिए गुप्त नवरात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा जरूर करें। साथ ही ॐ शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंसनाय, पुरुषार्थ चतुष्ठाय लभाय च पति मे देहि कुरु कुरु स्वहा का जाप कम से कम पांच बार जरूर करें।
