जबलपुर में देश की सबसे बड़ी गांजा तस्करी पर सख़्त फैसला



एनडीपीएस विशेष कोर्ट ने सुनाई 12-12 साल की सजा, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

जबलपुर। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े गांजा तस्करी मामले में एनडीपीएस विशेष कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रक ड्राइवर महेश कुमार और हेल्पर मोहम्मद शकील मंसूरी को 12-12 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह कार्रवाई अगस्त 2023 में जब्त की गई 1200 किलो गांजा खेप से जुड़े मामले में हुई, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई थी।

लकड़ियों की आड़ में खुफिया केबिन, 12 क्विंटल गांजा बरामद

घटना 27 अगस्त 2023 की है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए वाहन चेकिंग के दौरान तिलवारा पुलिस को ओडिशा से आ रहे एक ट्रक की सूचना मिली थी। तत्कालीन आईजी उमेश जोगा के निर्देश और तत्कालीन एसपी तुषारकान्त विद्यार्थी की अगुवाई में पुलिस टीम ने ट्रक (CG 08 L-3830) को रोका। ऊपर से ट्रक में बड़ी-बड़ी लकड़ियां भरी थीं, लेकिन बारीकी से तलाशी लेने पर ड्राइवर के केबिन के पीछे एक खुफिया रास्ता मिला।
ट्रक को विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया था। करीब 40 मजदूरों की मदद से लकड़ियां हटाने पर 5 से 30 किलो के पैकेटों में भरा कुल 12 क्विंटल गांजा बरामद हुआ।

चार राज्यों में फैला नेटवर्क, मास्टरमाइंड अब भी फरार

जांच में खुलासा हुआ कि यह खेप ओडिशा से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश होते हुए हरियाणा और राजस्थान पहुंचाई जानी थी। आरोपी केवल 30 घंटे में तीन राज्यों की सीमाएं पार कर चुके थे। मामले में प्रयागराज के लकड़ी कारोबारी राकेश कुमार केशरवानी और ओडिशा के प्रतुल बैरागी को भी गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि तस्करी का मास्टरमाइंड अधीर राय (निवासी नबरंगपुर, ओडिशा), सुदम परमानिक, पलाश राय और वेद प्रकाश शर्मा अभी फरार हैं। अदालत ने पुलिस को फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश देते हुए उनकी फाइल खुली रखने के आदेश दिए हैं।

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