27 साल पुराने सहकारी बैंक घोटाले में दोष सिद्ध, 2 अप्रैल को होगी सजा पर अंतिम सुनवाई
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक और कानूनी झटका देने वाली खबर सामने आई है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने 2015 में उजागर हुए सहकारी बैंक भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराते हुए गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया है।
यह मामला मूल रूप से वर्ष 1998 में किए गए एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ा है, जिसमें नियमों के विपरीत बदलाव कर लाभ लेने के आरोप साबित हुए हैं।
एफडी में हेरफेर बना मामला
अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, विधायक ने अपनी मां सावित्री श्याम के नाम से जिला सहकारी ग्रामिक विकास बैंक में करीब 10.50 लाख रुपये की एफडी 3 साल के लिए कराई थी, जिस पर 13% से अधिक ब्याज मिल रहा था।
बाद में इस एफडी की अवधि को नियमों के विपरीत बढ़ाकर पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दिया गया। जांच में सामने आया कि यह बदलाव दस्तावेजों में हेरफेर कर किया गया था।
बैंक कर्मचारी की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे घोटाले की शिकायत बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एफडी अवधि बढ़ाने में नियमों की अनदेखी की गई और दस्तावेजों में कट-छांट कर फर्जीवाड़ा किया गया।
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए, जिसके बाद केस दर्ज हुआ और सुनवाई शुरू हुई। सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने विधायक को दोषी पाया।
पद का दुरुपयोग कर उठाया लाभ
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उस समय राजेंद्र भारती न केवल विधायक थे, बल्कि बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर एफडी की अवधि बढ़वाई, जिससे उनकी मां और संबंधित संस्था को अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिला।
27 साल पुराना मामला, अब आया फैसला
यह मामला करीब 27 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत अगस्त 1998 में हुई थी। लंबे समय तक चली जांच और सुनवाई के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
2 अप्रैल को सजा पर फैसला
दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोष सिद्ध होने के बाद सजा पर सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है। इस दौरान अभियोजन पक्ष कठोर सजा की मांग करेगा, जबकि बचाव पक्ष नरमी की अपील कर सकता है।
