सनातन धर्म में भगवान विष्णु की आराधना के लिए एकादशी व्रत को श्रेष्ठ माना गया है। सालभर में आने वाली 24 एकादशियों में ज्येष्ठ माह की अपरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इसे कई स्थानों पर अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
इस बार ज्येष्ठ माह की अपरा एकादशी 13 मई को रखा जा रहा है। धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत से जुड़े नियमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। ताकि आपको व्रत का पूर्ण लाभ मिल सके।
क्या है एकादशी व्रत के जुड़े नियम?
चावल खाना मना
हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है।
तामसिक भोजन त्याग
इसके अलावा, व्रत से एक दिन पहले से ही यानी दशमी तिथि से व्रत करने वाले साधक को प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और मसूर की दाल जैसे तामसिक भोजन का त्याग कर देना चाहिए।
तुलसी पत्ते तोड़ना सख्त मना
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त मना है। साथ ही इस दिन पर तुलसी में जल चढ़ाने की भी मनाही होती है।
कहा जाता है कि, इस दिन माता तुलसी भी एकादशी व्रत करती हैं। इसलिए, पूजा के लिए तुलसी दल हमेशा एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेने चाहिए।
अपशब्दों का न करें प्रयोग
धर्म ग्रथों के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत (Apra Ekadashi) केवल अन्न त्यागने का नहीं, बल्कि मन और विचारों को शुद्ध रखने का भी पर्व माना जाता है। व्रत के दौरान किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या द्वेष की भावना नहीं रखनी चाहिए। बताया जाता है कि,अपशब्द बोलना, झूठ कहना या किसी की निंदा करना भी व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है। साथ ही, दशमी तिथि की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया है।
दिन में सोना वर्जित
एकादशी के दिन व्रती को दिन में बिल्कुल नहीं सोना चाहिए। इस दिन का पूरा समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के ध्यान, भजन और मंत्रों का जप करना चाहिए। इस तिथि पर रात के समय भी ‘जागरण’ करने या भगवान के भजन-कीर्तन करने का विशेष महत्व बताया गया है।
दातून करना वर्जित
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन दातून करना वर्जित है। इसकी जगह आप नींबू, जामुन या आम के पत्तों को चबाकर या पानी से कुल्ला करके अपना मुख शुद्ध कर सकते हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो इससे आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
