नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे लोगों को अब बड़ी राहत मिलने लगी है। कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और बादलों की सक्रियता के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार फिलहाल देश में हीटवेव की स्थिति समाप्त हो चुकी है और आगामी दिनों में भी अधिकांश क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना रहने की संभावना है।
राजस्थान में लगातार दूसरे दिन धूल भरी आंधियों और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में रेतीले तूफान देखने को मिले, जिससे कुछ समय के लिए दृश्यता प्रभावित हुई। हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। राज्य का सबसे गर्म शहर फलौदी रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश में भी मौसम ने लोगों को राहत दी है। बलिया, मुरादाबाद, लखनऊ समेत कई जिलों में बारिश रिकॉर्ड की गई। राजधानी लखनऊ का अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग चार डिग्री सेल्सियस कम दर्ज हुआ, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली। वहीं उत्तराखंड में लगातार खराब मौसम के कारण केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। चंपावत जिले में उफनती नदी के कारण फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून तक केरल तट पर पहुंच सकता है। हालांकि इस वर्ष मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। विभाग का अनुमान है कि जून से सितंबर के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। इस बार मानसून सीजन में लगभग 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि सामान्य औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है।
आईएमडी ने 2 और 3 जून को उत्तर भारत के कई राज्यों में तेज हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रह सकता है। वहीं दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी अच्छी बारिश के आसार हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश और आंधी-तूफान का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का प्रकोप कम रहेगा। हालांकि मानसून की प्रगति और वर्षा की मात्रा पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
