डिंडौरी। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर दिखाई दिया। जिला मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर कनई सांगवा ग्राम पंचायत के महिला-पुरुषों ने जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण सुबह करीब साढ़े नौ बजे सड़क पर बर्तन रखकर बैठ गए, जिससे हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पिछले कई महीनों से पेयजल संकट बना हुआ है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने आखिरकार सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव में नल-जल योजना के तहत घरों तक कनेक्शन तो पहुंचाए गए हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीण महिला सरोज बाई के अनुसार, कभी-कभार पानी आता भी है तो उसकी मात्रा इतनी कम होती है कि दैनिक जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। स्थिति यह है कि गांव के कई हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिसके कारण लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और यातायात बहाल हो सका।
मौके पर नायब तहसीलदार शैलेश गौर, कोतवाली थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद नगपुरे, यातायात निरीक्षक सुभाष उईके सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
इस संबंध में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एसडीओ वी.के. कोल ने बताया कि विभाग को पहले इस समस्या की जानकारी नहीं थी। अब अधिकारियों की टीम गांव पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण कर रही है। पंचायत सचिव को जलापूर्ति का समय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही खराब हैंडपंपों की मरम्मत और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन सुधारने के लिए पंचायत से कार्ययोजना तैयार कर प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता को लेकर ग्रामीणों का सड़क पर उतरना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि अधिकारियों के आश्वासन जमीनी स्तर पर कब तक अमल में आते हैं और ग्रामीणों को इस संकट से राहत मिल पाती है या नहीं।
