राष्ट्रपति के दीक्षांत समारोह से पहले आरडीवीवी में हंगामा, मेधावी छात्रों ने लगाया भेदभाव का आरोप

 


राष्ट्रपति के दीक्षांत समारोह से पहले आरडीवीवी में बवाल: मेधावी छात्रों ने उठाए भेदभाव के सवाल, समान सम्मान की मांग

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीवीवी) के 36वें दीक्षांत समारोह से ठीक दो दिन पहले विश्वविद्यालय परिसर में असंतोष और विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन से पहले सैकड़ों स्वर्ण पदकधारी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

21 जून को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी पहुंचे मेधावी छात्रों ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि अंतिम समय में उन्हें बताया गया कि केवल 20 चयनित विद्यार्थियों को ही मंच पर बुलाकर राष्ट्रपति के हाथों स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि शेष लगभग 220 स्वर्ण पदकधारी, पीएचडी, डी.लिट. और डीएससी उपाधिधारकों को दर्शक दीर्घा में बैठकर समारोह का हिस्सा बनना होगा।

टॉपर सभी, फिर चयन का आधार क्या?

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का सवाल है कि जब सभी स्वर्ण पदकधारी अपने-अपने विषयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र हैं, तो आखिर किस मापदंड के आधार पर केवल 20 लोगों का चयन किया गया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन चयन प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक नहीं कर पाया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई छात्रों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने हजारों किलोमीटर की यात्रा की, भारी पंजीयन शुल्क जमा किया और परिवार के साथ इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने जबलपुर पहुंचे, लेकिन अब उन्हें केवल दर्शक की भूमिका में सीमित किया जा रहा है।

अनुच्छेद-14 का हवाला, समानता की मांग

आक्रोशित विद्यार्थियों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लेख करते हुए समानता के अधिकार की बात उठाई। उनका कहना है कि यदि समय और प्रोटोकॉल के कारण सभी छात्रों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित करना संभव नहीं है, तो शेष विद्यार्थियों को कुलाधिपति अथवा राज्यपाल के हाथों मंच पर सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी मेधावी छात्र को उपेक्षित महसूस न हो।

प्रदर्शन के दौरान अभद्रता का आरोप

विरोध प्रदर्शन के बीच एक और विवाद सामने आया। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि कुलगुरु कार्यालय के बाहर प्रदर्शन समाप्त कराने के दौरान विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अनुचित व्यवहार किया। छात्राओं ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

कुलगुरु ने छात्रों को दिया भरोसा

स्थिति को गंभीर होता देख कुलगुरु ने छात्र प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए अपने कक्ष में बुलाया। बैठक के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय की पुरानी परंपराओं और गरिमा को बनाए रखने की मांग रखते हुए सभी मेधावियों को समान सम्मान देने का आग्रह किया।

कुलगुरु ने छात्रों की बात सुनने के बाद मामले पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले निर्णय पर छात्रों, अभिभावकों और पूरे शैक्षणिक जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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