Kanwar Yatra 2026 Date : कांवड़ यात्रा कब से कब तक? जानें तारीख और महत्व, लगेंगे बम बम भोले के जयकारे



सावन माह में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। इस दौरान शिवभक्त केसरिया रंग के वस्त्र पहनकर भारी संख्या में गंगाजल लेने निकल जाते हैं। वहीं, सावन शिवरात्रि के दिन वापस आकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और इसी के साथ ही कांवड़ यात्रा समाप्त हो जाती है। कांवड़िये इस दौरान गंगोत्री, हरिद्वार आदि पवित्र स्थानों से कांवड़ में गंगाजल भरकर अपने घर के पास वाले शिवमंदिर में शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा को बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है और भक्तों के लिए कांवड़ यात्रा बहुत ही खास और महत्वपूर्ण है। ऐसे में आइए पंडित राकेश झा से विस्तार से जानते हैं की कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब से हो रही है और इसका महत्व।
कांवड़ यात्रा 2026 कब से कब तक?
पंडित राकेश झा के अनुसार, सावन का महीना शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी आरंभ हो जाती है। चूंकि इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से हो रही है। ऐसे में इसी दिन से कांवड़ यात्रा भी शुरू होगी। हालांकि, मकर संक्रांति के अनुसार कई स्थानों पर कांवड़ यात्रा शुरू हो चुकी है। वहीं, इस यात्रा का समापन सावन शिवरात्रि पर होता है, जो 11 अगस्त, मंगलवार को पड़ रही है। ऐसे में मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से लेकर 11 अगस्त तक चलेगी। कई स्थानों पर पूरे सावन भी कांवड़ यात्रा चलती है।3 से 11 अगस्त की अवधि रहेगी महत्वपूर्ण
प. राकेश झा बताते हैं कि 3 अगस्त से लेकर 11 अगस्त तक रास्तों और मंदिर में शिव भक्त बड़ी संख्या में नजर आएंगे। इसकी वजह है की 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि। ऐसे में इस अवधि के दौरान कांवड़ियों के भीतर एक अलग ही जोश देखने को मिलता है। सभी लोग 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले के जयकारे' लगाते नजर आते हैं। साथ ही, मंदिरों में भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगती है और कांवड़िया अपने घर की ओर बढ़ रहे होते हैं। ऐसे में भक्तों की सुविधाओं के लिए कई रास्तों को बंद कर दिया जाता है। यही कारण है की इन दिनों में भारी जाम का सामना करना पड़ सकता है।सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व
कांवड़ यात्रा बेहद पवित्र तीर्थ यात्रा है जो शिवभक्त भोलेनाथ की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए करते हैं। इस दौरान कोई भक्त नंगे पांव चलता है, कोई पूरी यात्रा पैदल करता है, तो कोई बाइक पर सवार होकर भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए जाता है। मान्यता है की कांवड़ यात्रा में बांस से बने कांवड़ को उठाने और पवित्र जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यह कांवड़ यात्रा शिवजी के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। कहा जाता है कि ऐसा करने से शिव भगवान की कृपा अपने भक्तों पर बनी रहती है और साथ ही मोक्ष के द्वार खुलते हैं।

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