रक्षा मंत्रालय की जमीन पर चला ‘सैटेलाइट सर्वे’ का डंडा



सीओडी से सटी भूमि का सीमांकन शुरू, अतिक्रमणकर्ताओं की पहचान और अवैध निर्माण रिकॉर्ड में दर्ज

जबलपुर।रक्षा मंत्रालय के सख्त निर्देशों के बाद सेंट्रल आर्डिनेंस डिपो (सीओडी) से लगी रक्षा भूमि पर अब तक का सबसे व्यापक सीमांकन और सर्वे अभियान शुरू कर दिया गया है। यह पहला मौका है जब सीमांकन के साथ-साथ अतिक्रमणकर्ताओं की पहचान भी की जा रही है और अवैध निर्माणों को सैटेलाइट इमेज के साथ आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है।


इस विशेष सर्वे में रक्षा संपदा विभाग (डीईओ) के अमले के साथ स्थानीय सैन्य प्रशासन, जिला प्रशासन और कैंट बोर्ड के अधिकारी संयुक्त रूप से शामिल हैं। कार्रवाई के दायरे में गोकलपुर मार्केट की दुकानों की नपाई भी की जा रही है, जहां जमीन का स्वामित्व रिकॉर्ड पूरी तरह रक्षा मंत्रालय के खाते में दर्ज है।
सर्वे के बाद तय मानी जा रही बेदखली

अधिकारियों के अनुसार, सर्वे पूरा होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अपरिहार्य होगी। जिन दुकानों और प्रतिष्ठानों की नपाई हो रही है, उनके दस्तावेजों की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है।
सरकारी जमीन पर ‘शो-रूम संस्कृति’

बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय की बेशकीमती भूमि पर बड़े-बड़े शो-रूम और व्यावसायिक ढांचे खड़े कर दिए गए। जब सर्वे टीम ने जमीन पर काबिज व्यापारियों से स्वामित्व दस्तावेज मांगे, तो अधिकतर के पास सिर्फ टैक्स रसीदें ही मिलीं—स्वामित्व का कोई वैध प्रमाण नहीं।
सेटिंग के सहारे खड़े हुए अवैध निर्माण

प्राथमिक जांच में संकेत मिल रहे हैं कि शासकीय जमीन पर ‘सेटिंग’ के सहारे अवैध निर्माण किए गए। अब रक्षा मंत्रालय की सख्ती के बाद यह पूरा घालमेल परत-दर-परत उजागर हो रहा है।

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