इंदौर के दूषित पानी पर सियासी उबाल, कांग्रेस ने खुद उतरे मैदान में—वार्ड-वार सैंपलिंग शुरू
जबलपुर। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से हुई मौतों के बाद अब सियासत गरमा गई है। शहर में गहराते जल संकट और प्रशासन की कथित लापरवाही को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने शहर के अलग-अलग वार्डों से पानी के सैंपल लेने की मुहिम शुरू कर दी है, ताकि हकीकत को सामने लाया जा सके।
महापौर के वार्ड से ‘शुद्धिकरण’ की शुरुआत
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सैंपलिंग अभियान की शुरुआत सबसे पहले महापौर के गृह वार्ड से की। विपक्ष का तर्क है कि जब प्रथम नागरिक के क्षेत्र में ही पानी की शुद्धता संदिग्ध है, तो बाकी शहर का हाल समझा जा सकता है। इस दौरान नागरिकों को पोर्टेबल वाटर टेस्ट किट भी बांटी गईं, ताकि लोग अपने घरों में आने वाले पानी की स्वयं जांच कर सकें।
‘पाइप लाइन नहीं, ज़हर की सप्लाई’—कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के नगराध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा कि ड्रेनेज और पाइप लाइन के नाम पर 250 करोड़ रुपये बहा दिए गए, फिर भी जनता को पानी नहीं, ज़हर पीने को मजबूर किया जा रहा है। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही है।
सरकारी लैब भेजे जा रहे सैंपल
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि एकत्रित पानी के सैंपल सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद सरकार और नगर निगम को कठघरे में खड़ा किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
कांग्रेस के संगीन आरोप
नालों के बीच पाइप लाइन: कई इलाकों में पेयजल पाइप लाइनें गंदे नालों के बीच से गुजर रही हैं, जिससे सीवेज पानी की मिलावट का खतरा बढ़ गया है।
बैक्टीरिया का खतरा: प्रारंभिक दावों के मुताबिक पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार का मुद्दा: पिछले 15 वर्षों में पाइप लाइन मेंटेनेंस पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को सुरक्षित पेयजल नहीं मिल रहा।
कांग्रेस ने चेताया है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं प्रशासन पर बढ़ते दबाव के बीच पूरे प्रदेश में जल सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
