बोर्ड परीक्षा में सख्ती: उद्दंडता पर भी होगा पूरा रिजल्ट निरस्त, नकल पर ज़ीरो टॉलरेंस



जबलपुर। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब केवल नकल करना ही नहीं, बल्कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात शिक्षकों, पर्यवेक्षकों या केंद्राध्यक्षों से बदतमीजी करना भी भारी पड़ सकता है। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार का उद्दंड व्यवहार पाए जाने पर परीक्षार्थी का संपूर्ण परीक्षाफल निरस्त कर दिया जाएगा।



मंडल के इन सख्त निर्देशों के बाद नकल माफियाओं और अनुशासनहीन छात्रों में हड़कंप मचा हुआ है। जारी गाइडलाइन के मुताबिक दंड की तीव्रता अपराध की प्रकृति पर निर्भर करेगी। यदि कोई छात्र एक विषय में नकल सामग्री के साथ पकड़ा जाता है, उत्तर पुस्तिका फाड़ता है या चिट निगलने जैसी हरकत करता है, तो केवल उसी विषय की परीक्षा रद्द मानी जाएगी।
लेकिन यदि छात्र एक से अधिक विषयों में नकल करते पकड़ा गया या नकल के साथ-साथ शिक्षकों से अभद्रता करता है, तो उसकी पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और सभी विषयों का परीक्षाफल निरस्त कर दिया जाएगा।
सामूहिक नकल पर सख्त प्रहार: केंद्र का रिजल्ट शून्य, दोषियों पर 5 साल का बैन

बोर्ड ने व्यक्तिगत नकल के साथ-साथ सामूहिक नकल रोकने के लिए भी कठोर प्रावधान किए हैं। यदि किसी परीक्षा केंद्र पर कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी या निरीक्षण दल द्वारा सामूहिक नकल की पुष्टि होती है, तो उस केंद्र के सभी संबंधित छात्रों का पूरा रिजल्ट रद्द कर दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, सामूहिक नकल में शामिल या लापरवाही बरतने वाले केंद्राध्यक्षों और पर्यवेक्षकों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों को आगामी 5 वर्षों तक मंडल के सभी परीक्षा कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
मूल्यांकन में भी कड़ी निगरानी

मंडल ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी केंद्र की कम से कम 10 उत्तर पुस्तिकाओं में एक-तिहाई उत्तर समान भाषा शैली और प्रस्तुति में पाए जाते हैं, तो उसे सामूहिक नकल माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उन छात्रों की अन्य विषयों की कॉपियों की भी सूक्ष्म जांच होगी और गड़बड़ी मिलने पर रिजल्ट रोक दिया जाएगा।
स्पष्ट किया गया है कि जिन छात्रों पर नकल प्रकरण दर्ज होगा, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ही नहीं कराया जाएगा।

मंडल का यह कदम साफ संकेत देता है कि बोर्ड परीक्षा में अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।

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