आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम घर और ऑफिस की दीवारों के बीच कैद होकर रह गए हैं। जिसकी वजह से शरीर में विटामिन डी की कमी होना आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूरज की पहली किरणें एक जादुई पावर बैंक की तरह काम करती हैं।
आधुनिक लाइफस्टाइल में सुख सुविधाएं तो हैं लेकिन प्रकृति से यह हमें दूर कर देती है। दिनभर कमरे में बंद रहने की वजह से भारत की एक बड़ी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या का सबसे सरल और मुफ्त इलाज हमारे घर की बालकनी या छत पर ही मौजूद है। दरअसल हम बात कर रहे हैं सुबह की धूप की।
विटामिन डी का नेचुरल पावर हाउस
सूरज की किरणें विटामिन डी का सबसे बड़ा और प्राकृतिक सोर्स है। जब सुबह की हल्की धूप हमारी स्किन पर पड़ती है तो शरीर में विटामिन डी बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह न केवल हड्डियों को मजबूती देती है बल्कि कैल्शियम के अवशोषण में भी मदद करती है।
तनाव से मुक्ति और बेहतर नींद
धूप सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। सूरज की रोशनी में बैठने से शरीर में सेरोटोनिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है जिसे हैप्पी हार्मोन भी कहा जाता है। यह तनाव और डिप्रेशन को कम कर आपको खुशी का एहसास कराता है। साथ ही यह हमारे स्लीप चक्र (Melatonin) को नियमित करता है जिससे रात में गहरी और सुकून भरी नींद आती है।
मेटाबॉलिज्म और एनर्जी बूस्टर
विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह की हल्की धूप शरीर की अग्नि (पाचन शक्ति) को सक्रिय करती है जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। यह ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती है जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व पूरे शरीर तक बेहतर पहुंचते हैं।
धूप लेने का सही समय और तरीका
सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच की धूप सबसे सुरक्षित और प्रभावी होती है। इस समय अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें कम हानिकारक होती हैं। रोजाना सिर्फ 10 से 20 मिनट तक धूप में टहलना या बैठना आपके पूरे दिन की वाइटैलिटी (जीवन शक्ति) को बढ़ा सकता है।
सर्दियों के मौसम में तो धूप की अहमियत और भी बढ़ जाती है। यह एक मुफ्त और सबसे प्रभावी तरीका है अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने का। तो आज ही अपनी दिनचर्या में 15 मिनट की सन बाथ को शामिल करें और दवाओं पर अपनी निर्भरता कम करें।
