अक्सर कई लोगों की सुबह की शुरुआत ताजगी के बजाय बंद नाक, लगातार छींकों और सिर के भारीपन से होती है। अधिकांश लोग इसे सामान्य सर्दी या मौसम का बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मामूली दिखने वाली समस्या असल में पुराना नजला (Chronic Rhinitis) हो सकती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति बिगड़कर साइनस या नाक की हड्डी बढ़ने जैसी गंभीर परेशानियों का रूप ले सकती है।
क्यों बढ़ती है जकड़न
आयुर्वेद में पुराने नजले को मुख्य रूप से शरीर में कफ दोष के असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। जब शरीर में कफ की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह श्वसन मार्ग और सिर के हिस्सों में जमा होने लगता है। रात के समय सोते हुए यह कफ जम जाता है जिसका अहसास सुबह उठते ही नाक बंद होने और भारीपन के रूप में होता है।
इन कारणों को न करें नजरअंदाज
- नींद की कमी शरीर के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ती है और कफ दोष को बढ़ाती है।
- फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम या ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन नजले को ट्रिगर करता है।
- बार-बार संक्रमण होना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर बाहरी एलर्जी से लड़ने में सक्षम नहीं है।
- हवा में मौजूद बारीक कण नाक की झिल्ली में सूजन पैदा कर देते हैं।
- रात के समय दही, चावल या भारी भोजन करने से शरीर में कफ का निर्माण तेज हो जाता है।
- कई बार पेट का एसिड रात में गले तक आकर नाक के मार्ग में जकड़न पैदा करता है।
घर बैठे कैसे पाएं राहत
आयुर्वेद में पुराने नजले का बहुत ही सरल और प्रभावी समाधान छिपा है। छोटे-छोटे बदलाव आपकी सुबह को सुखद बना सकते हैं।
- सुबह उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी पिएं। यह कफ को पिघलाकर बाहर निकालने में मदद करता है।
- हफ्ते में कम से कम दो बार भाप लें। इससे सांस लेने की नली साफ होती है और सूजन कम होती है।
- अदरक, तुलसी और काली मिर्च की चाय का सेवन फेफड़ों को डिटॉक्स करता है।
- रात को सोते समय नाक में गुनगुने तेल (जैसे अणु तेल या सरसों तेल) की एक-एक बूंद डालना बेहद लाभकारी है।
- रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
यदि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है या नाक से खून आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। प्राणायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करना इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है।
