एमपी का ‘मेहमान गिद्ध’ पहुंचा उज्बेकिस्तान: 3 देशों की सरहद पार कर तय किया 3 हजार KM का सफर

 


मध्य प्रदेश के रायसेन से उड़ान भरने वाला एक दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। “पंछी नदिया पवन के झोंके, कोई सरहद भी ना इन्हें रोके…” गीत की ये पंक्तियां इस गिद्ध पर बिल्कुल सटीक बैठ रही हैं, जिसने भारत से उड़ान भरते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाएं पार कर अब उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है।

बताया जा रहा है कि यह दुर्लभ काला गिद्ध, जिसे ‘सिनेरियस वल्चर’ के नाम से जाना जाता है, दिसंबर 2025 में विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र में घायल और बेहद कमजोर हालत में मिला था। इसके बाद उसे भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में उपचार और विशेष देखरेख के लिए लाया गया। लंबे इलाज और निगरानी के बाद जब उसकी स्थिति पूरी तरह सामान्य हुई, तब उसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया।

सीएम मोहन यादव ने किया था मुक्त

फरवरी 2026 में डॉ मोहन यादव ने इस गिद्ध को उसके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। वन विभाग और संरक्षण टीम ने उसके शरीर पर जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस भी लगाया था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

शुरुआत में कुछ समय तक गिद्ध की लोकेशन मिलती रही, लेकिन बाद में ट्रैकिंग सिग्नल अचानक बंद हो गया। इसके बाद पता चला कि यह गिद्ध राजस्थान के रास्ते करीब 1300 किलोमीटर की उड़ान भरते हुए पाकिस्तान के खानेवाल क्षेत्र तक पहुंच गया है।

पाकिस्तान से अफगानिस्तान होते हुए पहुंचा उज्बेकिस्तान

भारत के इस गिद्ध के पाकिस्तान पहुंचने की जानकारी मिलते ही वर्ल्ड वाइड फेडरेशन इंडिया (WWF-India) ने पाकिस्तान की शाखा से संपर्क किया। जानकारी के मुताबिक वहां गिद्ध का रेस्क्यू कर उसका उपचार भी किया गया।

अब ताजा जानकारी के अनुसार यह गिद्ध पाकिस्तान से आगे बढ़ते हुए अफगानिस्तान की सीमा पार कर उज्बेकिस्तान पहुंच चुका है। अब तक यह दुर्लभ पक्षी करीब 3 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुका है।

Post a Comment

Previous Post Next Post