नई प्रणाली के तहत फ्लाई ऐश का परिवहन अब अत्याधुनिक मशीनों और विशेष कंटेनरों के माध्यम से किया जाएगा। इससे लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे समय की बचत होगी और कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।
प्रदूषण में कमी, सुरक्षित ट्रांसपोर्ट की ओर बड़ा कदम
पहले फ्लाई ऐश का परिवहन सड़क मार्ग से बल्करों और रेलवे के जरिए टारपोलिन से ढंके रैक में किया जाता था, जिससे प्रदूषण और संचालन से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं। नए रेलवे प्लेटफॉर्म के निर्माण से इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हुआ है। अब परिवहन कम प्रदूषण के साथ अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
15 करोड़ की लागत, 630 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म
यह आधुनिक प्लेटफॉर्म 630 मीटर लंबा है और करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तय समय-सीमा में तैयार किया गया है। इसकी खासियत है कि एक बार में पूरा रेल रैक इस पर खड़ा किया जा सकता है, जिससे लोडिंग-अनलोडिंग बेहद आसान हो जाती है।
कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस उपलब्धि पर अभियंताओं, कर्मचारियों और श्रमिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म न केवल परिचालन क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लागत में कमी लाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी पीएम गतिशक्ति परियोजना के तहत लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और आधुनिक समाधान अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
