कटनी में सरकार के ‘स्कूल चले अभियान’ की जमीनी हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब बहोरीबंद विधानसभा के ग्राम चरगवा के दर्जनों छात्र अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुँच गए। गाँव में हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने से नाराज छात्रों ने हाथों में खाली बस्ते और मांगों से जुड़े पंपलेट लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने “तुम हमें स्कूल दो, हम तुम्हें शिक्षित भारत देंगे” जैसे नारे लगाए। छात्रों ने प्रतीकात्मक रूप से अपना खाली बस्ता अपर कलेक्टर को सौंपते हुए कहा कि उनके गाँव में शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है। किताबों से भरने वाले बस्ते अब संघर्ष और परेशानी का प्रतीक बन गए हैं।
छात्रों ने बताया कि हाई स्कूल न होने के कारण उन्हें रोजाना करीब 8 किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ता है। सुबह 6 बजे घर से निकलने वाले बच्चे शाम तक लौट पाते हैं। रोजाना 16 किलोमीटर के सफर ने उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों पर असर डालना शुरू कर दिया है। बच्चों का कहना है कि सफर की थकान के बाद घर पहुँचकर पढ़ाई के लिए समय और ऊर्जा नहीं बचती।
अभिभावकों ने भी प्रशासन के सामने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि दूरदराज स्कूल भेजना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा जोखिम है। उनका कहना है कि आर्थिक और सामाजिक परेशानियों के बीच कई परिवार ऐसे हैं, जो बच्चों को इतनी दूर पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। यदि गाँव में जल्द हाई स्कूल नहीं खुला तो कई बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट सकती है।
स्थानीय समाजसेवी अनिल सिंह सेंगर ने बताया कि ग्रामीण कई वर्षों से गाँव में हाई स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। कई बार आवेदन और ज्ञापन देने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीण और छात्र बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कलेक्ट्रेट परिसर में बच्चों के खाली बस्तों के साथ हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि मासूम छात्रों की इस पुकार पर आखिर कब कार्रवाई होती है।
