13 साल से लापता व्यक्ति का अब तक नहीं मिला सुराग, हाई कोर्ट ने बंद की याचिका, लेकिन पुलिस को जारी रखनी होगी तलाश



जबलपुर। 13 वर्षों से लापता एक व्यक्ति का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने के मामले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका के निराकरण का अर्थ यह नहीं है कि पुलिस की जिम्मेदारी समाप्त हो गई है। पुलिस को गुमशुदा व्यक्ति की तलाश और मामले की जांच लगातार जारी रखनी होगी।

यह महत्वपूर्ण आदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने पारित किया।

2013 में मेडिकल परीक्षण के दौरान हुआ था लापता

अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, बेलखेड़ा निवासी गोविंद प्रसाद चौधरी मई 2013 में एक हमले के बाद पुलिस की अभिरक्षा में मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाए गए थे। इसके बाद वे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। घटना के बाद पुलिस ने कई स्तरों पर उनकी तलाश की, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल सका।

इस मामले में उनकी पत्नी विनिता चौधरी ने वर्ष 2014 में हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

बार-बार स्टेटस रिपोर्ट मंगाने से नहीं निकलेगा समाधान

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद केवल बार-बार स्टेटस रिपोर्ट मंगाते रहना अब किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता। इसलिए याचिका का निराकरण किया जाता है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस का वैधानिक दायित्व यहीं समाप्त नहीं होता।

तलाश जारी रखने के निर्देश

युगलपीठ ने पुलिस को निर्देश दिए कि गुमशुदा व्यक्ति की तलाश और उससे संबंधित सभी शिकायतों की जांच निरंतर जारी रखी जाए। यदि भविष्य में गोविंद प्रसाद चौधरी का पता चलता है, तो उन्हें उनकी पत्नी विनिता चौधरी के सुपुर्द किया जाए।

13 साल पुराने रहस्य से पर्दा उठने का इंतजार

हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक बार फिर उन मामलों की गंभीरता को रेखांकित किया है, जिनमें वर्षों बीत जाने के बाद भी गुमशुदा लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया भले समाप्त हो जाए, लेकिन जांच एजेंसियों का दायित्व तब तक बना रहेगा, जब तक इस 13 वर्ष पुराने रहस्य से पूरी तरह पर्दा नहीं उठ जाता।


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