जबलपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो वाहन का बीमा दावा अस्वीकार करने को अनुचित ठहराते हुए इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पन्ना निवासी कमलेश कुमार लोधी को करीब 7.95 लाख रुपये का बीमा दावा ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि दुर्घटना के समय वाहन स्वयं बीमाधारक कमलेश कुमार लोधी नहीं, बल्कि उनका पुत्र चला रहा था। ऐसे में केवल सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
सिर्फ सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर खारिज किया गया था क्लेम
फरियादी की ओर से अधिवक्ता अरुण जैन ने आयोग के समक्ष दलील दी कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत किए केवल सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा निरस्त कर दिया। कथित गवाहों के बयान तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज भी रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए गए।
सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत के प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना के समय वाहन स्वयं कमलेश कुमार लोधी चला रहे थे। आयोग ने माना कि स्वतंत्र एवं ठोस साक्ष्यों के अभाव में केवल सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
दो माह में भुगतान करने के निर्देश
आयोग ने आदेश दिया है कि इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी दो माह के भीतर 7,95,839 रुपये की बीमा राशि का भुगतान करे। यह राशि 20 मार्च 2021 से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा की जाएगी।
इसके अलावा आयोग ने बीमाधारक को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 20 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति तथा 2 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो बीमा दावों के निराकरण में कंपनियों की मनमानी का सामना करते हैं। आयोग ने अपने आदेश से स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के बिना किसी उपभोक्ता का वैध बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
