भारत में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके पीछे खानपान की गलत आदतें और कई हेल्थ कंडीशन्स जिम्मेदार हो सकती हैं। सामान्यतः लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को केवल तनाव, मोटापा, धूम्रपान या असंतुलित खानपान से जोड़कर देखते हैं। जबकि, डॉक्टर बलबीर सिंह (ग्रुप चेयरमैन, कार्डियक साइंसेज, पैन मैक्स और चीफ ऑफ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, साकेत) बताते हैं कि यह अंदरूनी हार्मोनल समस्या जैसे थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। थायरॉइड ग्रंथि शरीर के कई मुख्य कार्यों को नियंत्रित करती है, जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती है तो इसका प्रभाव हृदय और ब्लड प्रेशर दोनों पर ही पड़ता है। आगे जानते हैं कि इन दोनों के बीच क्या कनेक्शन होता है।
क्या हाइपोथायरायडिज्म हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है?कई स्टडी बताती हैं कि हाइपोथायरायडिज्म और हाई ब्लड प्रेशर के बीच सीधा संबंध हो सकता है। हाइपोथायरायडिज्म में शरीर पर्याप्त मात्रा में थायरॉक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) हार्मोन नहीं बना पाता। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, हृदय की गति और रक्त वाहिकाओं में लचीलापन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जब इन हार्मोन्स की कमी होती है, तो रक्त वाहिकाएं सख्त होने लगती हैं और उनमें रक्त प्रवाह सही तरह से नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर, बढ़ सकता है। कई शोध के अनुसार, हाइपोथायरायडिज्म वाले मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया।
हाइपोथायरायडिज्म का असल मतलब है थायरॉयड ग्लैंड का कम एक्टिव होना, जिससे हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, खासकर डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (ब्लड प्रेशर का निचला स्तर)। फिलहाल, क्या इनके बीच कोई सीधा संबंध है या हाइपोथायरॉइड मरीजों को हाइपरटेंशन होने का खतरा अधिक होता है, यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। लेकिन, इनका संबंध इसलिए है क्योंकि थायरॉयड हार्मोन दिल की धड़कन की ताकत और रफ्तार को कंट्रोल करते हैं, जब शरीर में इन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है, तो दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और धीमी धड़कन के साथ सिकुड़ने की ताकत भी बढ़ जाती है।
हाइपोथायरायडिज्म में नसों का सख्त होनाहाइपोथायरायडिज्म में खून की नसें सख्त हो सकती हैं और उनमें लचीलापन कम हो सकता है, और हृदय खुद भी हाई ब्लड प्रेशर में योगदान दे सकता है। इसलिए, अगर किसी को हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर है, तो थायरॉयड लेवल की जांच करना हमेशा अच्छा रहता है, और इसके उलट अगर किसी को हाइपोथायरायडिज्म है, तो ध्यान से जांच करनी चाहिए और उन्हें घर पर बार-बार ब्लड प्रेशर चेक करने के लिए कहना चाहिए क्योंकि दोनों ही बहुत आसान हैं। थायरॉयड टेस्ट (TSH लेवल) से इसके स्तर को मॉनिटर किया जा सकता है, इसलिए हर हाइपरटेंशन वाले मरीज को अपना थायरॉयड लेवल चेक करवाना चाहिए।
हाइपोथायरायडिज्म में किन चीजों से बचना चाहिए?डॉक्टर बताते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म होने पर ब्लड प्रेशर को मैनेज किया जा सकता है। बस कुछ दवाओं से बचना चाहिए। कुछ दवाएं जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स दिल की धड़कन को धीमा कर सकती हैं। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि हाइपोथायरायडिज्म ज्यादातर मामलों में मरीज की दिल की धड़कन धीमी होती है। हालांकि, यह मरीज की दिल की धड़कन पर निर्भर करता है। हाइपोथायरायडिज्म से दिल की धड़कन धीमी होती है और कई दवाएं भी ऐसा ही करती हैं, इसलिए दवाओं लेते समय डॉक्टर से संपर्क करें।
ब्लड प्रेशर को कम करने के उपायअगर हम देखें कि ब्लड प्रेशर को कैसे कम किया जा सकता है, तो अच्छी डाइट, पोटैशियम से भरपूर डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, नियमति योग अभ्यास, कार्डियो - ये सभी ब्लड प्रेशर कम करने में बहुत मददगार हैं।
एक खास डाइट, जिसे DASH डाइट कहते हैं ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। इस डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स, मछली, नट्स और बीज शामिल होते हैं।
खाने में नमक की मात्रा कम करने से भी फायदा हो सकता है। एक व्यक्ति को रोजाना 1500 मिलीग्राम से अधिक सोडियम नहीं लेना चाहिए।ये हेल्दी आदतें हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरटेंशन, दोनों में मदद करती है। इनके बीच गहरा संबंध है, इसलिए हाइपोथायरायडिज्म वाले हर मरीज की हाइपरटेंशन के लिए और हाइपरटेंशन वाले हर मरीज की थायरॉयड के लिए जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही हृदय रोग और हाइपरटेंशन वाले सभी मरीजों को रूटीन तौर पर थायरॉयड की जांच करनी चाहिए। इसके बाद ही मरीजों को सही इलाज शुरू करना चाहिए।
