योग दिवस पर नर्मदा में दिखा अद्भुत फ्लोटिंग मलखंब, पानी में तैरते खंभे पर खिलाड़ियों ने किए रोमांचक योगासन

 


जबलपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जहां देशभर में योग के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं संस्कारधानी जबलपुर में योग और भारतीय पारंपरिक खेलों के अनूठे संगम का अद्भुत नजारा देखने को मिला। नर्मदा नदी के जिलहरी घाट पर खिलाड़ियों ने पानी में तैरते हुए "फ्लोटिंग मलखंब" पर हैरतअंगेज योगासन और कलात्मक मुद्राओं का प्रदर्शन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नर्मदा की लहरों पर तैरता रहा मलखंब, खिलाड़ियों ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा

योग दिवस से एक दिन पूर्व आयोजित इस विशेष प्रदर्शन में मलखंब खिलाड़ियों ने नर्मदा नदी के बीच तैरते प्लेटफॉर्म पर स्थापित मलखंब पर संतुलन बनाते हुए विभिन्न योगासन, आकृतियां और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया। नदी की लहरों के बीच यह प्रदर्शन न केवल रोमांचकारी रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति और योग परंपरा की समृद्ध विरासत का भी परिचायक बना।

हजारों वर्षों पुरानी है मलखंब की परंपरा

मलखंब भारत की प्राचीन खेल एवं व्यायाम परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इतिहासकारों के अनुसार मल्ल युद्ध और मलखंब का उल्लेख अनेक पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी की कलाकृतियों में भी मलखंब के प्रमाण दिखाई देते हैं। वहीं 1135 ईस्वी में चालुक्य राजा सोमेश्वर तृतीय द्वारा लिखित ग्रंथों में भी इस खेल का उल्लेख मिलता है।

पहलवानों की ताकत और पकड़ बढ़ाने का प्रमुख माध्यम

राष्ट्रीय स्तर के मलखंब खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक विनोद मोथा के अनुसार, प्राचीन काल में लगभग हर अखाड़े में पहलवान अपनी शारीरिक क्षमता और पकड़ मजबूत करने के लिए मलखंब का अभ्यास करते थे। लकड़ी से बने इस चिकने खंभे पर तेल लगाया जाता है, जिस पर चढ़कर खिलाड़ी विभिन्न प्रकार के व्यायाम और करतब करते हैं।

उन्होंने बताया कि मलखंब पर अभ्यास करने से शरीर की ताकत, संतुलन, लचीलापन और पकड़ की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह खेल लंबे समय तक भारतीय अखाड़ों का अभिन्न हिस्सा बना रहा।

मध्य प्रदेश ने दिया राज्य खेल का दर्जा

समय के साथ अखाड़ा संस्कृति कमजोर होने से मलखंब का चलन भी कम हुआ, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में मलखंब को राज्य खेल का दर्जा देकर इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इसके बाद युवाओं में इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी है और नए खिलाड़ी लगातार इससे जुड़ रहे हैं।

फ्लोटिंग मलखंब बना आकर्षण का केंद्र

मलखंब प्रशिक्षक विनोद मोथा ने इस पारंपरिक खेल को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने के लिए फ्लोटिंग मलखंब की अवधारणा विकसित की है। इसके लिए फोम और नायलॉन की सहायता से एक विशेष तैरता प्लेटफॉर्म तैयार किया गया, जिस पर लोहे के बेस के माध्यम से मलखंब स्थापित किया गया।

इस प्लेटफॉर्म को नर्मदा नदी के जिलहरी घाट पर पानी में उतारा गया, जहां खिलाड़ियों ने तैरते हुए मलखंब पर शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। योग दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह अनूठा प्रयोग भारतीय खेल परंपरा और योग संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक अभिनव प्रयास माना जा रहा है।

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