सदर में गहराया जल संकट, निजी बोरवेल वाले क्षेत्रों से भी पहुंच रही टैंकरों की मांग

 


जबलपुर। भीषण गर्मी और लगातार घटते भूजल स्तर के कारण सदर क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हालात इस कदर गंभीर हो चुके हैं कि जिन इलाकों में अधिकांश घरों में निजी बोरवेल मौजूद हैं, वहां से भी अब पानी के टैंकरों की मांग बढ़ने लगी है। बढ़ती जरूरतों के बीच कैंट बोर्ड का पेयजल आपूर्ति विभाग सीमित संसाधनों के बावजूद पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।

कैंट बोर्ड के पेयजल आपूर्ति विभाग के पास वर्तमान में तीन वॉटर टैंकर हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सदर बाजार के कुछ हिस्सों के अलावा संजय गांधी नगर और राजीव गांधी नगर के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षभर टैंकरों से जलापूर्ति की जाती है। हालांकि इस बार स्थिति अलग है। उन क्षेत्रों से भी पानी की मांग आने लगी है जहां पहले निजी बोरवेलों के कारण कभी जल संकट नहीं देखा गया था। परिणामस्वरूप टैंकरों को लगभग पूरे दिन अलग-अलग इलाकों में दौड़ाना पड़ रहा है।

पुराने जल स्रोतों की फिर बढ़ी अहमियत

पेयजल संकट ने लोगों को एक बार फिर उन पारंपरिक जल स्रोतों की याद दिला दी है जो कभी सदर की पहचान हुआ करते थे। क्षेत्र की लगभग हर गली में कभी न कभी हैंडपंप या कुआं मौजूद था, लेकिन समय के साथ इनका उपयोग बंद होता गया। कई कुएं उपेक्षा के कारण बंद हो गए, जबकि कुछ में लोगों ने कचरा डालना शुरू कर दिया, जिससे वे अनुपयोगी हो गए।

लेकिन इस वर्ष की भीषण गर्मी और जल संकट ने इन प्राकृतिक स्रोतों की उपयोगिता को फिर से सामने ला दिया है। स्थानीय नागरिकों और प्रशासन ने कई पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल शुरू की है।

कुओं और हैंडपंपों की मरम्मत का अभियान

जल संकट से निपटने के लिए हाल ही में काली माई मंदिर के पास स्थित पुराने कुएं की मोटर को दुरुस्त कराया गया है। वहीं बाबादीन चौराहे के समीप स्थित कुएं की सफाई और मोटर की मरम्मत कराई गई। इसके अलावा गली नंबर-10 में खराब पड़ी बोरवेल मशीन को ठीक किया गया तथा क्षेत्र के हैंडपंप को भी पुनः चालू कराया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुराने कुओं, हैंडपंपों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता तो आज जल संकट की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बढ़ती आबादी और भूजल के अंधाधुंध दोहन के बीच पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण भविष्य की आवश्यकता बन चुका है।

जल संरक्षण की बढ़ी जरूरत

सदर क्षेत्र में बढ़ती पानी की मांग और घटते जलस्तर ने एक बार फिर जल संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया है। नागरिकों का मानना है कि वर्षा जल संचयन, पुराने कुओं के पुनर्जीवन और भूजल के संतुलित उपयोग पर गंभीरता से काम किए बिना आने वाले वर्षों में जल संकट और अधिक विकराल रूप ले सकता है।

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