राजनीतिक दबाव में पीड़ित पुलिसकर्मी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वाहन चेकिंग के दौरान एक पुलिसकर्मी से मारपीट करते हुए वर्दी फाड़ी गयी। राजनीतिक दवाब के कारण पुलिसकर्मी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा की तरफ से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि लार्डगंज थानान्तर्गत बल्देवबाग में वाहन चेकिंग दौरान पुलिसकर्मी ने बिना हेलमेट पहने वाहन चलाते हुए पूर्व महापौर प्रभात साहू को रोका था। उसके बाद उन्होंने अपना परिचय देते हुए पुलिसकर्मी के साथ अभ्रदता की। समर्थकों के हुजूम ने पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इसके बाद पुलिसकर्मी के खिलाफ राजनीतिक दबाव में एफआईआर दर्ज करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। पुलिसकर्मी की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया।
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता को कैसे सुरक्षा देंगे। वायरल वीडियो में आरोपियों की पहचान स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस कर्मी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। युगलपीठ ने अनावेदको को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। युगलपीठ ने लार्डगंज थाना प्रभारी को निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई में दर्ज की गयी दोनों एफआईआर व केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें।
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