मकर संक्रांति का पावन पर्व सनातन धर्म में बहुत ही शुभ एवं विशेष माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसी दिन से सभी शुभ कामों की शुरुआत दोबारा होती है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है साथ ही हिंदू श्रद्धालुगण गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपनी मंगल कामना के लिए प्रार्थना करते है।
आमतैर पर किसी भी तीज-त्योहार या पूजा-पाठ के मौके पर काले कपड़े पहनने से मना किया जाता है, लेकिन मकर संक्रांति एक मात्र ऐसा त्योहार है जब काले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इसके पीछे का कारण क्या है?
मकर संक्रांति पर काला रंग पहनना क्यों माना जाता है शुभ?
ज्योतिषयों के अनुसार, मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जहां काले रंग को अशुभ नहीं बल्कि शुभ माना जाता है। इस दिन लोग काले तिल, काले कपड़े और काले कंबल दान करते हैं। खासकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में काले वस्त्र पहनने की परंपरा प्रचलित है। इसके अलावा, मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं।
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में काले रंग का संबंध शनि देव से बताया गया है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन काले कपड़े पहनें जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन काला रंग पहनने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शनि और सूर्य का विशेष संबंध
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसके स्वामी शनि देव माने जाते हैं। शनि से जुड़े काले रंग को इस दिन धारण करने से शनि दोष शांत होने और नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है।
ठंड से जुड़ा वैज्ञानिक कारण
मकर संक्रांति जनवरी के महीने में आती है, जब ठंड चरम पर होती है। वैज्ञानिक रूप से काला रंग सूर्य की किरणों को अधिक अवशोषित करता है, जिससे शरीर को गर्मी मिलती है। यही कारण है कि इस मौसम में काले वस्त्र पहनना व्यावहारिक भी माना जाता है।
परंपरा, आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम
मकर संक्रांति पर काला पहनना केवल धार्मिक विश्वास नहीं बल्कि मौसम और खगोलीय परिवर्तन से भी जुड़ा है। यही वजह है कि इस पर्व पर काला रंग नकारात्मक नहीं बल्कि शुभ और लाभकारी माना जाता है।
