कोर्ट परिसर में पटाखा फोड़कर मचाई दहशत, चार आरोपी सलाखों के पीछे



जबलपुर। जिला अदालत के कोर्ट नंबर-2 के बाहर 17 मार्च को हुए धमाके के मामले में पुलिस ने गुरुवार को बड़ा खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह कोई विस्फोटक हमला नहीं, बल्कि सामान्य आतिशबाजी के पटाखे थे, जिन्हें आरोपियों ने अपने साथी के केस में अनुकूल गवाही मिलने की खुशी में फोड़ा था।

घटना सोमवार शाम करीब 5 से 5:15 बजे के बीच की है, जब कोर्ट की कार्यवाही जारी थी। अचानक हुए तेज धमाके से कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। वकील और पक्षकार घबराकर बाहर निकल आए। मौके पर धुआं और बम जैसे अवशेष मिलने से पहले इसे गंभीर सुरक्षा चूक और संभावित हमले के रूप में देखा गया।

बम निरोधक दस्ता (BDS) की जांच में साफ हुआ कि धमाका साधारण पटाखों से किया गया था। हालांकि, कोर्ट जैसे अति संवेदनशील स्थान पर इस तरह की हरकत को पुलिस ने गंभीर अपराध माना है।

घटना के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के निर्देश पर सीएसपी सोनू कुर्मी और टीआई राजपाल सिंह बघेल की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले। माढ़ोताल क्षेत्र में घेराबंदी कर चारों आरोपियों को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस के अनुसार आरोपी तन्मय राजपूत, अनूप श्रीपाल, दक्ष राजपूत और अनुज राजपूत कोर्ट के गेट नंबर-3 से अंदर दाखिल हुए और कुछ देर बाद पटाखे फोड़ दिए। आरोपियों ने बताया कि उनके साथी मनीष अहरिवार के केस में गवाही उनके पक्ष में जाने की खुशी में उन्होंने यह कदम उठाया।

इस घटना ने एक बार फिर कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बड़े खतरे का रूप ले सकती हैं।

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