जबलपुर कलेक्ट्रेट में ‘लव जिहाद’ को लेकर बवाल, 9 अंतरधार्मिक विवाहों की सूची पर विवाद तेज



जबलपुर। देशभर में ‘लव जिहाद’ को लेकर जारी बहस के बीच जबलपुर का कलेक्ट्रेट एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अपर कलेक्टर कार्यालय के बाहर लगे सूचना पटल पर विवाह आवेदन करने वाले युवक-युवतियों की सूची चस्पा की गई है। इस सूची में 9 हिंदू युवतियों के नाम मुस्लिम युवकों के साथ विवाह के लिए दर्ज होने पर विवाद खड़ा हो गया है।

बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट में विवाह आवेदन की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इस बार सूची में दर्ज अंतरधार्मिक विवाहों ने माहौल को गरमा दिया है।
संगठनों का विरोध, ज्ञापन सौंपा

हिंदू संगठनों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
संगठनों का आरोप है कि ये विवाह सुनियोजित तरीके से कराए जा रहे हैं और इसमें युवतियों को बहला-फुसलाकर शामिल किया जा रहा है।
परिवार को सूचना न मिलने का आरोप

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि विवाह संबंधी नोटिस संबंधित युवतियों के घर तक नहीं पहुंचते। आरोप लगाया गया कि प्रक्रिया के दौरान नोटिस को बीच में ही रोक लिया जाता है, जिससे परिजनों को जानकारी नहीं मिल पाती।
अधिवक्ता ने उठाए कानूनी सवाल

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने भी कलेक्टर के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत की है। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय में विवाह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक माना जाता है, जिससे इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया और संवेदनशील हो जाती है।
उन्होंने विशेष रूप से विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2020 के तहत निर्धारित नियमों के पालन की मांग की है।
निष्पक्ष जांच की मांग



अधिवक्ता ने आशंका जताई कि कुछ मामलों में दबाव या प्रलोभन की स्थिति हो सकती है, इसलिए हर आवेदन की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से सभी प्रक्रियाओं जैसे नोटिस, सत्यापन और सहमति का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बात कही।

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