खुशियों के बीच मौत का सन्नाटा: कार में लॉक 3 साल के बच्चे ने तोड़ा दम



बिलाड़ा (जोधपुर)। एक छोटी सी लापरवाही ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को ताउम्र के गम में तब्दील कर दिया। जोधपुर के बिलाड़ा कस्बे में बुधवार दोपहर एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया, जहां पिता की ही कार मासूम के लिए 'काल' बन गई। बेंगलुरु से जिस बेटे के मुंडन और नए घर की खुशियां मनाने परिवार गांव आया था, उसी मासूम की अर्थी उठने से पूरा क्षेत्र स्तब्ध है।
पंचोलियों का बास निवासी विष्णु जांगिड़ का 3 वर्षीय पुत्र हितार्थ घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक गायब हो गया। घर में समारोह की तैयारियों के शोर-शराबे के बीच किसी का ध्यान बच्चे पर नहीं गया। करीब डेढ़ घंटे बाद जब तलाश की गई, तो बच्चा घर के पास खड़ी कार के अंदर बेहोश मिला। वह गलती से कार के अंदर जाकर बैठ गया था और दरवाजा अंदर से लॉक हो गया। भीषण गर्मी और दम घुटने ने ली जान
परिजनों ने बच्चे को तुरंत स्थानीय ट्रोमा सेंटर पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार बंद कार में तापमान कुछ ही मिनटों में जानलेवा स्तर तक पहुंच जाता है।
ऑक्सीजन की कमी : एयरफ्लो बंद होने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो बच्चों के लिए बेहद घातक साबित होता है।
तेजी से असर : बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तापमान और ऑक्सीजन की कमी के प्रति अधिक संवेदनशील होता है।
खुशियां मातम में तब्दील : हादसे के वक्त घर में मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश की तैयारियां चल रही थीं। परिवार में जश्न का माहौल था, जो एक पल में चीख-पुकार में बदल गया। फिलहाल इस मामले में पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।
प्रशासन और जनता के लिए सबक: यह घटना एक चेतावनी है कि खड़ी कार को कभी भी खुला न छोड़ें और बच्चों को कार के आसपास अकेले न खेलने दें। आपकी एक मिनट की चूक किसी मासूम की जान ले सकती है।

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