मध्यप्रदेश में आयोगों में बड़ी नियुक्तियां: अटकलों पर विराम, नई टीम तैयार



भोपाल। लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं और राजनीतिक अटकलों के बाद मध्यप्रदेश में विभिन्न आयोगों में नियुक्तियों को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंजूरी के बाद सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

एससी-एसटी आयोग में नई कमान

अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर पूर्व विधायक कैलाश जाटव को नियुक्त किया गया है। उनके साथ रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है। जाटव इससे पहले पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं और 2013 में नरसिंहपुर की गोटेगांव सीट से विधायक रह चुके हैं।

वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग की कमान एक बार फिर रामलाल रौतेल को सौंपी गई है। यह उनका दूसरा कार्यकाल होगा—इससे पहले वे 2010 में भी इस पद पर रह चुके हैं। आयोग में भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य नियुक्त किया गया है।

महिला आयोग में भी जल्द नियुक्तियां

इसी के साथ राज्य महिला आयोग में भी नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए रेखा यादव के नाम पर सहमति बन चुकी है, जबकि साधना स्थापक और समीक्षा गुप्ता को सदस्य बनाए जाने की संभावना है।
खास बात यह है कि महिला आयोग में करीब छह साल बाद नियुक्तियां होने जा रही हैं, क्योंकि यह मामला लंबे समय तक कानूनी विवाद में उलझा रहा।

बाल संरक्षण आयोग की तैयारी

बाल संरक्षण आयोग के लिए डॉ. निवेदिता शर्मा को अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी है। उनके साथ सोनम निनामा, अर्चना गुप्ता, मोनिका बट्टी और सीमा सिंह को सदस्य नियुक्त किए जाने पर सहमति बनी है।

दिल्ली से हरी झंडी के बाद अंतिम मुहर

जानकारी के अनुसार बीजेपी ने आयोगों और प्राधिकरणों के लिए 23 नामों की सूची दिल्ली भेजी थी। शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श के बाद अब इन नामों को अंतिम रूप देकर नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके थे कि इस बार सभी आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की पूरी टीम एक साथ घोषित की जाएगी—और अब वही होता दिख रहा है।

क्या बदलेगा?

इन नियुक्तियों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि ये आयोग जमीनी स्तर पर कितनी सक्रियता दिखाते हैं और लंबित मामलों को कितनी तेजी से निपटाते हैं।
राजनीतिक समीकरणों के साथ-साथ सामाजिक न्याय से जुड़े इन संस्थानों की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है।

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