जबलपुर नगर निगम में फिर लौटे दलाल! सख्ती गई, सेटिंग का सिस्टम चालू



जबलपुर। शहर के सबसे बड़े प्रशासनिक दफ्तर, नगर निगम में एक बार फिर वही पुराना खेल लौटता दिख रहा है—दलालों का दबदबा और सिस्टम की खामोशी। कभी सख्त फैसलों के लिए चर्चित रहीं प्रीति यादव के कार्यकाल में जिन बाहरी लोगों पर निगम मुख्यालय में एंट्री तक बैन लगा दिया गया था, अब वही चेहरे दोबारा गलियारों में नजर आने लगे हैं।

सख्ती के बाद ढील, फिर सक्रिय हुआ नेटवर्क

प्रीति यादव ने अपने कार्यकाल में साफ संदेश दिया था कि निगम के कामकाज में बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं होगा। फाइलों के साथ छेड़छाड़ और दलाली पर रोक लगाने के लिए उन्होंने दो संदिग्ध बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध तक लगाया था। उस दौरान कुछ समय के लिए व्यवस्था पटरी पर भी आई लेकिन उनके जाते ही जैसे पूरा सिस्टम फिर ढीला पड़ गया।

अब हालात ये हैं कि वही प्रतिबंधित लोग फिर से निगम दफ्तर में खुलकर घूम रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि एक व्यक्ति नियमित रूप से भवन शाखा में बैठकर मकान निर्माण, नक्शा पास कराने और अन्य कार्यों की “सेटिंग” कर रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी, संरक्षण के आरोप

सबसे बड़ा सवाल यही है जब पहले इन पर प्रतिबंध था, तो अब ये खुलेआम कैसे?
सूत्रों का दावा है कि कुछ अधिकारियों के साथ इन दलालों की गहरी सेटिंग है। यही वजह है कि ये लोग न सिर्फ दफ्तर में बैठते हैं, बल्कि सीधे अधिकारियों के साथ फाइलों का लेन-देन भी करते हैं।

आम नागरिक जहां महीनों चक्कर काटते हैं, वहीं दलालों के जरिए आने वाली फाइलें “फास्ट ट्रैक” पर निपट रही हैं। इससे साफ है कि सिस्टम में कहीं न कहीं अंदरूनी सहमति मौजूद है।

अतिक्रमण विभाग बना वसूली का अड्डा

मामला सिर्फ भवन शाखा तक सीमित नहीं है। अब अतिक्रमण विभाग भी इस जाल में फंस चुका है।
शहर में अवैध निर्माण और कब्जों को “संरक्षण” देने के नाम पर दलाल खुलेआम वसूली कर रहे हैं। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े बिल्डरों तक हर स्तर पर यह नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है।

कई मामलों में दलाल खुद को निगम अधिकारियों का “प्रतिनिधि” बताकर पैसे वसूल रहे हैं, जिससे आम लोगों में डर और भ्रम दोनों पैदा हो रहे हैं।

सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम

नगर निगम की यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है—

  • क्या प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं?
  • या फिर सब कुछ जानकारी में होते हुए भी नजरअंदाज किया जा रहा है?
  • क्या पूर्व में लागू सख्त फैसलों को जानबूझकर कमजोर किया गया?

छवि धूमिल, भरोसा कमजोर

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर लगातार उठते सवाल उसकी साख को प्रभावित कर रहे हैं। जहां आम जनता के वैध काम लटक रहे हैं, वहीं दलालों की “सीधी एंट्री” सिस्टम की निष्पक्षता पर चोट कर रही है।

अगर समय रहते इन बाहरी तत्वों पर दोबारा सख्ती नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह दलाली तंत्र और मजबूत हो सकता है जिसका सीधा असर शहर के विकास और जनता के भरोसे पर पड़ेगा।

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