जबलपुर | एमपी अविरल न्यूज़ जबलपुर जिले में नई आबकारी नीति लागू होते ही शराब कारोबारियों और विभाग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। भीषण गर्मी के बीच जहां बीयर की मांग चरम पर है, वहीं ठेकेदारों को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। कारोबारियों का आरोप है कि आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारी चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचा रहे हैं, जबकि बाकी दुकानों पर भारी कमी बनी हुई है।
ऑनलाइन सिस्टम दरकिनार करने के आरोप
जिले की 143 शराब दुकानों के लिए निर्धारित ऑनलाइन स्टॉक आवंटन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार पोर्टल पर मांग दर्ज करने वालों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन हकीकत में “पहले से तय” लोगों को स्टॉक दिया जा रहा है। तकनीकी खामियों और “स्टॉक खत्म” का हवाला देकर अन्य ठेकेदारों को टाल दिया जाता है।
करोड़ों के निवेश पर संकट
इस वर्ष शराब दुकानों का आवंटन पिछले साल से 15–20% अधिक कीमत पर हुआ है। ठेकेदारों ने भारी ब्याज पर कर्ज लेकर लाइसेंस लिए हैं, लेकिन शुरुआती दिनों में ही सप्लाई ठप होने से आर्थिक दबाव बढ़ गया है। कई दुकानों पर हालत यह है कि एक पेटी बीयर तक उपलब्ध नहीं है, जिससे रोजमर्रा का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
कर्ज और वेतन का संकट
व्यापारियों का कहना है कि बैंक की किश्तें, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। अगर जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो कई ठेकेदार कारोबार बंद करने की स्थिति में आ सकते हैं।
कलेक्टर से करेंगे शिकायत, आंदोलन की चेतावनी
स्थिति से नाराज शराब कारोबारियों ने अब सामूहिक रूप से कलेक्टर से शिकायत करने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि यदि पारदर्शी वितरण प्रणाली लागू नहीं की गई, तो वे उच्च स्तर पर विरोध दर्ज कराते हुए बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
