जबलपुर से चिल्पी तक दौड़ेगा विकास का फोरलेन कॉरिडोर, एमपी-छत्तीसगढ़ की दूरी होगी आसान



जबलपुर। महाकौशल और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एक बड़ी सड़क परियोजना पर काम शुरू हो गया है। जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ के चिल्पी तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को अब आधुनिक फोरलेन सड़क में बदला जाएगा। करीब 160 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इस सड़क के बनने से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच यातायात पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।

यह फोरलेन कॉरिडोर प्रयागराज-जबलपुर-रायपुर मार्ग को आपस में जोड़ने का काम करेगा, जिससे न सिर्फ सफर आसान होगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। परियोजना के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग से आवश्यक मंजूरियां लेने की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है।

मार्च 2027 तक तैयार होगी डीपीआर, घाट सेक्शन होंगे सुरक्षित

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जबलपुर परियोजना निदेशक अमृत लाल साहू के मुताबिक, सड़क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में यह मार्ग भारी वाहनों के दबाव और संकरी सड़क के कारण अक्सर जाम की समस्या से जूझता है।

खासतौर पर नाग घाट, भवाल घाट और चिल्पी घाट के तीखे मोड़ों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। नई योजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के जरिए इन मोड़ों को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाया जाएगा। ढलानों को मजबूत किया जाएगा ताकि पहाड़ी मार्गों पर सफर सुरक्षित रह सके।

इसके अलावा बीजाडांडी और बिछिया जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों में बायपास, फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे शहरों के भीतर लगने वाले ट्रैफिक दबाव में कमी आएगी।

जंगल और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

यह प्रस्तावित मार्ग कान्हा टाइगर रिजर्व के नजदीक और घने जंगलों से होकर गुजरता है। ऐसे में सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।

वन्यजीवों की आवाजाही को प्रभावित न करने के लिए विशेष एनिमल अंडरपास और वाइल्डलाइफ क्रॉसिंग बनाए जाएंगे। वन क्षेत्रों में वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए आधुनिक संकेतक बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लगाई जाएंगी।

सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई कम से कम हो, इसके लिए नई तकनीक के जरिए पेड़ों का प्रत्यारोपण किया जाएगा। साथ ही पूरे मार्ग के किनारे हरित पट्टी विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना बनाई गई है।

व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

फोरलेन कॉरिडोर बनने के बाद मध्यभारत की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। जबलपुर, मंडला और आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। वहीं कान्हा राष्ट्रीय उद्यान आने वाले पर्यटकों का सफर भी पहले से अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

भेड़ाघाट, धुआंधार, मदन महल और ग्वारीघाट जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होगा, जिससे पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाओं और स्थानीय बाजारों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भविष्य में यह सड़क जबलपुर रिंग रोड और रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से भी जुड़ेगी, जिससे उद्योगों और कृषि मंडियों के बीच माल परिवहन तेज और कम लागत वाला हो सकेगा।

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