एंबुलेंस की लापरवाही बनी मौत की वजह?



ऑक्सीजन नहीं, समय पर मदद नहीं… मां को पीठ पर उठाकर अस्पताल से बाहर लाया बेटा

नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिला अस्पताल में 108 एंबुलेंस सेवा की कथित लापरवाही ने एक महिला की जान ले ली। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतका के परिजनों ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। मृतका के बेटे हसन खान ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि समय पर एंबुलेंस और ऑक्सीजन सुविधा नहीं मिलने के कारण उनकी मां छम्मो बी की मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार, गोटेगांव निवासी छम्मो बी को अचानक हृदयाघात होने पर जिला अस्पताल लाया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया, लेकिन यहीं से लापरवाही और अव्यवस्था का सिलसिला शुरू हो गया।

हसन खान का आरोप है कि जिस 108 एंबुलेंस से मरीज को रेफर किया जाना था, वह अस्पताल वार्ड से करीब 200 मीटर दूर खड़ी थी। इतना ही नहीं, एंबुलेंस कर्मी वर्दी में भी मौजूद नहीं थे और काफी तलाश के बाद भी तत्काल नहीं मिले। मजबूरी में परिजनों ने तेज धूप के बीच मरीज को व्हीलचेयर पर बैठाकर खुद एंबुलेंस तक पहुंचाया।

आरोप है कि एंबुलेंस में मरीज को लिटाने के बाद कर्मचारियों ने ऑक्सीजन पर्याप्त न होने की बात कहते हुए जबलपुर ले जाने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी सहयोग करने के बजाय उन्हें हतोत्साहित किया।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बेटे को अपनी मां को पीठ पर उठाकर अस्पताल गेट तक लाना पड़ा। इसके बाद परिजन ऑटो से एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां उपचार के दौरान छम्मो बी ने दम तोड़ दिया।


मृतका के बेटे ने शिकायत में कहा है कि यदि समय पर एंबुलेंस और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो उनकी मां की जान बच सकती थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद कर्मचारी खुद को बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भरा होने का दावा करने लगे।


हसन खान ने कलेक्टर से मांग की है कि एंबुलेंस की लॉग बुक, ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और 108 एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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