लोकायुक्त का डबल अटैक: चाय की दुकान से एएसआई ट्रैप, दफ्तर में बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार

 


सिवनी/जबलपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने सिवनी जिले में एक ही दिन में दो बड़ी कार्रवाई कर सरकारी महकमों में मचे घूसखोरी के खेल का पर्दाफाश कर दिया। एक तरफ कोतवाली थाना का एएसआई चाय की दुकान पर रिश्वत लेते दबोचा गया, तो दूसरी तरफ विकासखंड कार्यालय का बाबू सरकारी कर्मचारी का बकाया भुगतान निकालने के नाम पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया गया। दोनों कार्रवाइयों के बाद जिले के सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मच गया है।

चाय की दुकान बनी रिश्वत का अड्डा, एएसआई गिरफ्तार

पहला मामला सिवनी कोतवाली थाना से जुड़ा है, जहां पदस्थ कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक दिनेश रघुवंशी पर रिश्वत लेने का आरोप लगा। शिकायतकर्ता नंदकिशोर चौरसिया ने लोकायुक्त एसपी से शिकायत की थी कि उनके बेटे अभिषेक चौरसिया को नौकरी और सरकारी विभाग में वाहन लगाने का झांसा देकर ठगी की गई थी, जिसकी एफआईआर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी।

आरोप है कि मामले की जांच कर रहे एएसआई दिनेश रघुवंशी ने सही रिपोर्ट लगाने और फर्जी हस्ताक्षर की जांच कराने के बदले 30 हजार रुपए की मांग की। बाद में रिश्वत की रकम 20 हजार रुपए में तय हुई। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और आरोपी एएसआई को चाय की दुकान पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।

लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

बकाया भुगतान के नाम पर बाबू कर रहा था सौदेबाजी

लोकायुक्त की दूसरी कार्रवाई सिवनी जिले के धनोरा विकासखंड कार्यालय में हुई, जहां सहायक ग्रेड-3 अरुण कुमार कमरे को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

शिकायतकर्ता देवेंद्र सिरसाम, जो शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुनवारा में भृत्य पद पर पदस्थ हैं, ने शिकायत में बताया कि निलंबन अवधि के दौरान रुका हुआ करीब 1 लाख 65 हजार रुपए का जीवन निर्वाह भत्ता निकालने के एवज में आरोपी बाबू 32 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा था। शिकायत के सत्यापन के दौरान सौदा 25 हजार रुपए में तय हुआ।

लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी बाबू को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामले

सिवनी जिले में एक ही दिन में हुई इन दो कार्रवाइयों ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि बिना रिश्वत दिए न तो पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ती है और न ही सरकारी दफ्तरों में फाइलें चलती हैं। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार किस तरह जड़ें जमा चुका है।

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