बिजली कंपनी में डिजिटल क्रांति: अब अलमारियों में नहीं, कंप्यूटर स्क्रीन पर दौड़ेंगी फाइलें



जबलपुर। सरकारी दफ्तरों में धूल खाती फाइलों और “फाइल कहाँ अटकी है” जैसे सवालों का दौर अब धीरे-धीरे खत्म होने जा रहा है। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जबलपुर मुख्यालय से इसकी औपचारिक शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में पूरा सिस्टम हाईटेक कार्यप्रणाली पर शिफ्ट होता नजर आएगा।

कंपनी प्रबंधन का दावा है कि इस नई व्यवस्था से कागजी फाइलों का बोझ कम होगा, कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा। इसके लिए 11 मई 2026 से 21 मई 2026 तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिसमें कर्मचारियों को डिजिटल माध्यम से फाइल संचालन की पूरी प्रक्रिया सिखाई जा रही है।

ट्रेनिंग का दौर शुरू, कर्मचारियों को सिखाई जा रही डिजिटल कार्यप्रणाली

ई-ऑफिस प्रणाली को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में जबलपुर स्थित सीटीआई परिसर में कर्मचारियों को ऑफलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां उन्हें कंप्यूटर पर फाइल तैयार करने, नोटशीट आगे बढ़ाने, अनुमोदन प्रक्रिया और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने जैसे तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

दूसरे चरण में क्षेत्रीय और मैदानी कार्यालयों के कर्मचारियों को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस दौरान आईटी विभाग के नोडल अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार सहयोग कर रहे हैं ताकि किसी भी कर्मचारी को नई व्यवस्था अपनाने में परेशानी न हो।

हर कर्मचारी को बनाया जाएगा डिजिटल दक्ष

हाल ही में आयोजित एक संयुक्त प्रशिक्षण सत्र में मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन एवं प्रशासन विभाग के अधिकारियों के साथ हेड सीएस एंड ए अरविंद सक्सेना और आईटी प्रबंधक राधा चतुर्वेदी ने ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में महाप्रबंधक स्थापना आर.सी. साहू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कंपनी का लक्ष्य सिर्फ सॉफ्टवेयर लागू करना नहीं, बल्कि हर कर्मचारी को डिजिटल कार्यप्रणाली में दक्ष बनाना है। जब तक सभी अधिकारी और कर्मचारी इस प्रणाली को पूरी तरह समझ नहीं लेते, तब तक प्रशिक्षण सत्र लगातार जारी रहेंगे।

फाइलों की “लोकेशन” अब होगी एक क्लिक दूर

ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव फाइलों के निपटारे की गति में देखने को मिलेगा। अब किसी फाइल के गुम होने, दबने या लंबित रहने जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी। हर फाइल की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

पुराने रिकॉर्ड खोजने में लगने वाला समय भी बचेगा और कागज के उपयोग में भारी कमी आएगी। कंपनी इसे डिजिटल इंडिया अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों का कार्यभार व्यवस्थित होगा और तनाव भी कम होगा।

मुख्यालय से लेकर मैदानी इकाइयों तक होगा विस्तार

कंपनी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में यह व्यवस्था केवल जबलपुर मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। सभी वितरण केंद्रों और मैदानी इकाइयों में भी इसी तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

प्रबंधन का लक्ष्य है कि पूरी कंपनी को चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस बनाया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि ई-ऑफिस लागू होने के बाद उपभोक्ताओं की शिकायतों का निराकरण भी तेजी से होगा और आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।

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