“मोबाइल नंबर बना सेंधमारी का रास्ता”: बिना OTP खाते से उड़ गए 3.78 लाख, बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल

 

जबलपुर। शहर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी गोविंद पचौरी के बैंक खाते से जालसाजों ने बेहद शातिराना तरीके से 3 लाख 78 हजार 765 रुपये पार कर दिए। हैरानी की बात यह है कि पूरी रकम खाते से निकल गई, लेकिन न तो पीड़ित के मोबाइल पर कोई ओटीपी आया और न ही पैसे कटने का कोई मैसेज।

पटेल आटा चक्की के पास रहने वाले गोविंद पचौरी का खाता State Bank of India की रांझी शाखा में संचालित है। पीड़ित ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराते हुए बताया कि ठगों ने उनके मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल कर बैंक खाते से जुड़ी नई यूपीआई आईडी बना ली और धीरे-धीरे पूरी जमा पूंजी साफ कर दी।

बिना अलर्ट खाते से निकलती रही रकम, खाते में बचा “शून्य”

पीड़ित के मुताबिक उन्हें किसी भी ट्रांजैक्शन की जानकारी मोबाइल पर नहीं मिली। न कोई ओटीपी आया और न ही बैंक से अलर्ट मैसेज। जब उन्हें खाते में गड़बड़ी का शक हुआ और बैंक पहुंचकर स्टेटमेंट निकलवाया गया, तब पता चला कि खाते से लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर साइबर अपराधी बैंकिंग सुरक्षा की परतों को इतनी आसानी से कैसे भेद रहे हैं।

पांच खातों में बांटकर निकाली गई पूरी रकम

बैंक स्टेटमेंट के अनुसार यह ठगी 5 मई से 9 मई 2026 के बीच की गई। जालसाजों ने रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग को मुश्किल बनाने की कोशिश की।

  • 5 मई को शिव प्रसाद के खाते में 90 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
  • 6 मई को आकाश कुमार के खाते में 70 हजार रुपये भेजे गए।
  • इसी दिन आमिर सुहैल के खाते में 20 हजार रुपये डाले गए।
  • 7 मई को मोहम्मद उबैद अंसारी के खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
  • 9 मई को जयेश चौहान के खाते में 98 हजार 765 रुपये भेजकर बैंक खाता लगभग खाली कर दिया गया।

पुलिस और साइबर सेल की जांच शुरू

मध्यप्रदेश पुलिस की कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीम उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई। तकनीकी विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि बिना ओटीपी और बैंक अलर्ट के आखिर यह ट्रांजैक्शन कैसे पूरे हुए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संबंधित खातों और मोबाइल कनेक्शन की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़ित की रकम वापस दिलाने का प्रयास भी किया जाएगा।

डिजिटल इंडिया के दौर में बढ़ती डिजिटल सेंधमारी

मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई ने जहां लेन-देन आसान बनाया है, वहीं साइबर ठग अब तकनीक को ही हथियार बनाकर लोगों की जिंदगी भर की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। सवाल सिर्फ गोविंद पचौरी के 3.78 लाख रुपये का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो लोग अपने बैंक खातों और डिजिटल सुरक्षा पर करते हैं।

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