“झाड़ू हाथ में, हक़ जेब से बाहर”: नगर निगम के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा गुस्सा, आज निकलेगा मशाल जुलूस

 


जबलपुर। शहर को साफ रखने वाले हाथ अब अपने ही हकों की लड़ाई लड़ने सड़क पर उतरने जा रहे हैं। जबलपुर नगर निगम में कार्यरत सफाई ठेका श्रमिकों और विभिन्न विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों के कथित आर्थिक और मानसिक शोषण के विरोध में मंगलवार शाम शहर में बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है। पूर्व विधायक विनय सक्सेना ने इस मुद्दे को लेकर विशाल मशाल जुलूस निकालने का ऐलान किया है।

यह मशाल जुलूस शाम 6 बजे मालवीय चौक से शुरू होकर नगर निगम कार्यालय तक पहुंचेगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों, आउटसोर्स कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।

“30 दिन का भुगतान, 26 दिन की मजदूरी” ... सवालों के घेरे में व्यवस्था

सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 18 महीनों से वेतन विसंगति और बकाया भुगतान को लेकर लगातार संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल आश्वासन ही मिले। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कलेक्टर दर के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा, बल्कि महज 220 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी देकर काम कराया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल उस कथित व्यवस्था पर उठ रहा है जिसमें नगर निगम ठेकेदार को पूरे 30 दिन का भुगतान कर रहा है, लेकिन श्रमिकों को केवल 26 दिनों की मजदूरी दी जा रही है। यानी पसीना मजदूर का और हिसाब किसी और का।

पीएफ और ईएसआईसी पर भी घिरा तंत्र

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनकी भविष्य निधि (PF) और ईएसआईसी की राशि भी नियमित रूप से जमा नहीं की जा रही। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक काम करने के बावजूद उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा, जिससे उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।

पूर्व विधायक विनय सक्सेना ने कहा कि यह लड़ाई केवल मजदूरी की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की भी है। उन्होंने शहरवासियों से मशाल जुलूस में शामिल होकर श्रमिकों की आवाज मजबूत करने की अपील की है।

“साफ शहर” के पीछे छिपी गंदगी?

शहर को “स्वच्छता” के पोस्टरों से सजाने वाला सिस्टम अब खुद सवालों के कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। जिन सफाई कर्मियों के दम पर शहर चमकता है, वही कर्मचारी आज अपने वेतन, पीएफ और मूल अधिकारों के लिए मशाल उठाने को मजबूर हैं।

अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस विरोध को सिर्फ एक और प्रदर्शन मानकर टालता है या फिर उन हाथों की सुनता है जो हर सुबह शहर की गंदगी साफ करते हैं, लेकिन वर्षों से अपनी तकलीफें साफ नहीं कर पाए।

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