जबलपुर। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नागरिकों को निर्धारित समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के 22 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कुल 34 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
दंडित अधिकारियों में रांझी की एसडीएम मोनिका बाघमारे, अतिरिक्त तहसीलदार भीमसेन पटेल और गोरखपुर के अतिरिक्त तहसीलदार आदित्य जंघेला भी शामिल हैं। इनके अलावा विभिन्न जनपद पंचायतों के कई ग्राम पंचायत सचिवों पर भी जुर्माना लगाया गया है।
पांच दिन में जमा करनी होगी राशि
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी दंडित अधिकारियों और कर्मचारियों को पांच दिनों के भीतर जुर्माने की राशि साइबर ट्रेजरी के माध्यम से शासकीय खाते में जमा करनी होगी। राशि जमा करने के बाद उसकी रसीद लोक सेवा प्रबंधन विभाग में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों के मासिक वेतन से यह राशि काट ली जाएगी।
इन अधिकारियों पर लगा जुर्माना
रांझी की एसडीएम मोनिका बाघमारे पर 1000 रुपये, अतिरिक्त तहसीलदार भीमसेन पटेल पर 250 रुपये तथा गोरखपुर के अतिरिक्त तहसीलदार आदित्य जंघेला पर 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
ग्राम पंचायत सचिवों में सिहोरा की कुशयारी पंचायत के संदीप सिंह ठाकुर और कुंडम की भैंसवाही पंचायत के जियालाल मार्को पर सबसे अधिक 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं बिलपठार पंचायत के थम्मन सिंह पटेल पर 3750 रुपये तथा मोहनी पंचायत की सचिव कल्पना पूसाम पर 3000 रुपये का दंड निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा सविता मांझी पर 2500 रुपये, प्रमोद कुशराम पर 2000 रुपये, जितेंद्र पाठक, रामप्रसाद तिलगाम और कमल मरावी पर 1750-1750 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। गणेश प्रसाद पटेल और क्रांतिभाई राजपूत पर 1000-1000 रुपये, जबकि आशीष कुमार दुबे और भगवानदास ठाकुर पर 750-750 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
शिवाजी पटेल, ब्रजेश पटेल, देवेंद्र कुमार, सुशीला वरकड़े और डोली पंचायत के करन सिंह पर 500-500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सबसे कम 250 रुपये का अर्थदंड पड़री पंचायत के सचिव प्रहलाद पटेल पर लगाया गया है।
जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम
प्रशासन का मानना है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह कार्रवाई की गई है। कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
